UGC के नए नियम पर अनोखा विरोध, युवक ने खून से लिखा पीएम को पत्र, कानून वापस लेने की मांग

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 12:20 AM

ugc equity rule controversy

कानपुर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ विरोध अब सड़कों से निकलकर अलग ही रूप ले चुका है। सनातन मंदिर रक्षा समिति से जुड़े आकाश ठाकुर....

नेशनल डेस्क: कानपुर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ विरोध अब सड़कों से निकलकर अलग ही रूप ले चुका है। सनातन मंदिर रक्षा समिति से जुड़े आकाश ठाकुर ने नियमों के विरोध में ऐसा कदम उठाया, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया।

खून से लिखा प्रधानमंत्री को पत्र

आकाश ठाकुर ने मंगलवार सुबह स्थानीय अस्पताल पहुंचकर वार्ड बॉय की मदद से अपना खून निकलवाया और उसी खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा।
पत्र में उन्होंने UGC के नए नियमों को “भेदभाव बढ़ाने वाला” बताते हुए कहा कि इससे सामान्य वर्ग और सवर्ण समाज के लोगों के अधिकार प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि यह नियम सामाजिक संतुलन बिगाड़ सकता है, इसलिए इसे या तो तुरंत वापस लिया जाए या फिर इसमें जरूरी संशोधन किया जाए।

“समाज के प्रति जिम्मेदारी से उठाया कदम”

आकाश ठाकुर ने बताया कि उनका यह कदम किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज और आम जनता की चिंता को लेकर है। उन्होंने कहा कि यह पत्र प्रधानमंत्री तक भेजा जाएगा ताकि सरकार इस कानून पर दोबारा विचार करे। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भी इस नियम के प्रभावों को समझें और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएं।

क्या है UGC का नया नियम, जिस पर मचा बवाल?

UGC ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से Equity Rule लागू किया है। इस नियम के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को:

  • 24×7 हेल्पलाइन
  • Equal Opportunity Centre
  • Equity Committee
  • Equity Squad

बनाना अनिवार्य होगा।

UGC का कहना है कि नियमों का पालन न करने पर संस्थानों की मान्यता रद्द की जा सकती है या फंड रोका जा सकता है।

Section 3(C) बना विवाद की जड़

इस नए नियम के Section 3(C) को लेकर सबसे ज्यादा विवाद खड़ा हुआ है। इसी प्रावधान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी दाखिल की गई है।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह नियम:

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  • समानता के अधिकार
  • व्यक्तिगत आज़ादी

का उल्लंघन करता है और इसे असंवैधानिक घोषित किया जाना चाहिए।

UGC ने क्यों जरूरी बताया यह नियम?

UGC के मुताबिक 2020 से 2025 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतों में 100% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए यह नियम तैयार किया गया।

आगे और तेज होगा विरोध?

कानपुर में शुरू हुआ यह विरोध अब चर्चा का विषय बन गया है। जिस तरह से प्रदर्शन का तरीका बदला है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में बहस और तेज हो सकती है।

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