UGC के नए नियम पर छिड़ा 'महायुद्ध, दिल्ली की सड़कों पर उतरे छात्र, नए नियमों पर BJP में मची खलबली

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 11:50 AM

ugc row massive student protests in delhi over new equity rules

UGC द्वारा 13 जनवरी 2026 को नोटिफाई किए गए नए नियमों के खिलाफ आज यानि 27 जनवरी को दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है। upper caste communities के छात्र संगठनों ने UGC मुख्यालय के घेराव का ऐलान किया है। छात्रों का कहना है कि ये नियम एकतरफा हैं...

नेशनल डेस्क: UGC द्वारा 13 जनवरी 2026 को नोटिफाई किए गए नए नियमों के खिलाफ आज यानि 27 जनवरी को दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन हो रहा है। upper caste communities के छात्र संगठनों ने UGC मुख्यालय के घेराव का ऐलान किया है। छात्रों का कहना है कि ये नियम एकतरफा हैं और इनका इस्तेमाल 'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' (उल्टा भेदभाव) के लिए किया जा सकता है।

क्या हैं नए नियम और क्यों मचा है बवाल?

UGC के इन नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में SC, ST और विशेष रूप से पहली बार शामिल किए गए OBC छात्रों के खिलाफ भेदभाव को रोकना है।

  • अनिवार्य समितियां: हर संस्थान में 'इक्वल अपॉर्चुनिटी सेंटर' और 'इक्विटी कमेटी' बनाना जरूरी है।
  • सख्त सजा: नियम न मानने पर यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द हो सकती है या फंडिंग रोकी जा सकती है।
  • विवाद की जड़: विरोध करने वालों का कहना है कि इन समितियों में 'जनरल कैटेगरी' का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है। साथ ही, झूठी शिकायतों पर सजा का प्रावधान हटा दिया गया है, जिससे इसके दुरुपयोग का डर बढ़ गया है।

BJP के भीतर भी उठे विरोध के स्वर

इस मुद्दे पर सत्ताधारी दल के भीतर भी मतभेद उभर आए हैं:

  • डॉ. संजय सिंह (पूर्व केंद्रीय मंत्री): उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि न्याय तभी सार्थक है जब वह सबके लिए समान हो। बिना संतुलित प्रतिनिधित्व वाली समितियां न्याय नहीं कर सकतीं।
  • प्रतीक भूषण सिंह (विधायक): उन्होंने इसे 'ऐतिहासिक अपराधी' के रूप में एक वर्ग को निशाना बनाने की कोशिश करार दिया।

इस्तीफे और राजनीतिक प्रतिक्रिया

विवाद इतना बढ़ा कि नीति से असहमति जताते हुए एक वरिष्ठ नौकरशाह और बीजेपी युवा विंग के एक नेता ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने चेतावनी दी है कि ये नियम समाज में जातिगत रार और मुकदमों का बोझ बढ़ाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका

नियमों की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में नियम 3(सी) को असंवैधानिक बताते हुए कहा गया है कि यह समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।

 

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