उत्तराखंड में ट्रैकिंग पर गई MBA छात्रा अचानक कैंप से गायब हो गई, 6 दिन से लापता, दोस्त हिरासत में

Edited By Updated: 04 Jun, 2026 10:26 AM

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उत्तराखंड के ट्रैकिंग रूट 'दायरा बुग्याल' से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां नैनीताल की रहने वाली 24 वर्षीय छात्रा बबीता पांडे पिछले 6 दिनों से लापता है। इस मामले में पुलिस ने बबीता के परिवार की शिकायत पर उसके साथ गए दो दोस्तों को हिरासत...

Uttarkashi Missing MBA Student : उत्तराखंड के ट्रैकिंग रूट 'दायरा बुग्याल' से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां नैनीताल की रहने वाली 24 वर्षीय छात्रा बबीता पांडे पिछले 6 दिनों से लापता है। इस मामले में पुलिस ने बबीता के परिवार की शिकायत पर उसके साथ गए दो दोस्तों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

CCTV में दिखे थे आखिरी बार
उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक (SP) कमलेश उपाध्याय ने बताया कि बबीता पांडे अपने दो दोस्तों- हरमनपाल सिंह (उधम सिंह नगर, उत्तराखंड) और हरमनप्रीत सिंह (शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश) के साथ घूमने निकली थी। ये तीनों 25 मई को देहरादून पहुंचे, जिसके बाद उन्होंने हर्षिल और गंगोत्री जैसी जगहों की सैर की। 28 मई को वे रायथल गांव पहुंचे और वहां रुके। रायथल गांव के सीसीटीवी कैमरों में इन तीनों को आखिरी बार एक साथ देखा गया था।

आधी रात को कैंप से अचानक गायब हुई बबीता
CCTV में दिखने के अगले दिन यानी 29 मई को तीनों ने रायथल से 'दायरा बुग्याल' के लिए अपनी ट्रैकिंग शुरू की। रात को रुकने के लिए उन्होंने 'गोई बेस कैंप' में टेंट लगाया। पुलिस के मुताबिक, 29-30 मई की आधी रात को बबीता अचानक कैंप से गायब हो गई, जिसके बाद से उसका कुछ पता नहीं चला है।

150 जवानों की टीम, खोजी कुत्ते और ड्रोन से तलाश
बबीता को ढूंढने के लिए इस समय पहाड़ों में एक बहुत बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। रेस्क्यू टीम में सेना, ITBP, SDRF, NDRF, पुलिस और वन विभाग के करीब 150 जवान शामिल हैं। घने जंगलों, गुफाओं और रास्तों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों और खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की मदद ली जा रही है। इसके अलावा, गोई कैंप के पास मौजूद एक झील में बबीता की तलाश के लिए 6 गोताखोरों की टीम को भी उतारा गया है।

फर्जी परमिट का भंडाफोड़: ट्रैकिंग एजेंसी सस्पेंड
जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि जिस 'प्रो माउंटेन' नाम की एजेंसी के जरिए ये लोग ट्रैकिंग पर गए थे, उसने बबीता और उसके दोस्तों को फर्जी परमिट पर भेजा था। जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी ने बताया कि सरकारी पोर्टल पर इनका कोई वैध डिजिटल परमिट नहीं था।

एजेंसी ने पैसे बचाने और रोजाना 150 ट्रैकर्स की सरकारी सीमा को दरकिनार करने के लिए एक पुराने एक्सपायर हो चुके परमिट पर बबीता और उसके दोस्तों के नाम चिपका दिए थे। जब चेकपोस्ट पर QR कोड स्कैन किया गया, तो उसमें पुराने यात्रियों का डेटा सामने आया। इस धोखाधड़ी की वजह से शुरुआत में रेस्क्यू टीम को यह समझने में देरी हुई कि लापता लड़की किस एजेंसी के जरिए आई थी। फिलहाल इस एजेंसी का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया गया है।

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