Edited By Anu Malhotra,Updated: 08 Jan, 2026 09:09 AM

दुनिया में कई अजीबोगरीब आर्थिक हालात देखने को मिलते हैं, लेकिन वेनेजुएला का हाल सुनकर कोई हैरान रह जाए। एक ऐसा देश जहां सोना, जिसे दुनिया के अधिकांश हिस्सों में सबसे कीमती धातु माना जाता है, वहां इतनी सस्ती दरों पर बिकता है कि भारत में किसी भी अच्छे...
नेशनल डेस्क: दुनिया में कई अजीबोगरीब आर्थिक हालात देखने को मिलते हैं, लेकिन वेनेजुएला का हाल सुनकर कोई हैरान रह जाए। एक ऐसा देश जहां सोना, जिसे दुनिया के अधिकांश हिस्सों में सबसे कीमती धातु माना जाता है, वहां इतनी सस्ती दरों पर बिकता है कि भारत में किसी भी अच्छे रेस्टोरेंट की चाय उससे महंगी लगती है।
भारत बनाम वेनेजुएला
आज भारत में 24 कैरेट सोने का 1 ग्राम लगभग 13,827 रुपये का है। वहीं, वेनेजुएला में यही सोना भारतीय मुद्रा में केवल 181 रुपये में खरीदा जा सकता है। हां, आपने सही पढ़ा – 181 रुपये में। अगर वहां आप भारतीय नजर से देखें, तो इतने पैसे में भारत में तो एक अच्छी चाय या कॉफी भी मुश्किल से मिलती है।
वेनेजुएला का 22 कैरेट सोना भी बेहद सस्ता है, जो लगभग 166 रुपये प्रति ग्राम के आस-पास बिकता है। लेकिन यह सस्ती दर देश की खुशहाली का संकेत नहीं है। इसका असली कारण है वेनेजुएलन बोलिवर की गिरती कीमत और आर्थिक संकट।
सोने का गुप्त ट्रांसफर
रॉयटर्स और स्विस मीडिया SRF की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2013 से 2016 के बीच राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन में करीब 113 मीट्रिक टन सोना स्विट्जरलैंड भेजा गया। इसका उद्देश्य था सरकारी खजाने को आर्थिक संकट से बचाना और कर्ज चुकाना। लेकिन इसका परिणाम उल्टा पड़ा। देश के स्वर्ण भंडार में लगातार गिरावट हुई और 2024 तक केवल 161 टन सोना ही बचा। भ्रष्टाचार और महंगाई ने सरकारी खजाने को लगभग खाली कर दिया।
वेनेजुएला की विडंबना यह है कि यह देश प्राकृतिक संसाधनों से बेहद धनी है। कच्चे तेल के वैश्विक भंडार का लगभग 17% इसी देश के पास है। इसके अलावा ‘ओरिनोको माइनिंग आर्क’ में 8,000 टन से अधिक सोना, हीरा और बॉक्साइट छिपा हुआ है। अगर इन संसाधनों का सही प्रबंधन किया जाता, तो वेनेजुएला आज दुनिया के सबसे अमीर देशों की कतार में होता। लेकिन कमजोर नीतियों और संसाधनों के खराब प्रबंधन ने देश की आर्थिक स्थिति को संकट में डाल दिया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, 2024 तक देश का आधिकारिक गोल्ड उत्पादन मात्र 30.6 टन रहा, जो वैश्विक स्तर पर नगण्य है।