Edited By Anu Malhotra,Updated: 26 Feb, 2026 09:08 AM

अगर आप सोने और चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो दुनिया के सबसे बड़े निवेश बैंकों की ताजा रिपोर्ट आपके होश उड़ा सकती है। वैश्विक बाजार में मची हलचल के बीच जेपी मॉर्गन (JP Morgan) और बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने कीमती धातुओं के भविष्य को लेकर नए...
नेशनल डेस्क: अगर आप सोने और चांदी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो दुनिया के सबसे बड़े निवेश बैंकों की ताजा रिपोर्ट आपके होश उड़ा सकती है। वैश्विक बाजार में मची हलचल के बीच जेपी मॉर्गन (JP Morgan) और बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने कीमती धातुओं के भविष्य को लेकर नए और चौंकाने वाले अनुमान जारी किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में सोने की चमक फीकी पड़ने के बजाय और भी ज्यादा गहराने वाली है, जो निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी साबित हो सकती है।
सोने पर जेपी मॉर्गन का बड़ा दांव: $6,300 का लक्ष्य
दिग्गज निवेश बैंक जेपी मॉर्गन ने अपने दीर्घकालिक (Long-term) आउटलुक को संशोधित करते हुए सोने की कीमतों में भारी उछाल की संभावना जताई है। बैंक का मानना है कि साल 2026 तक सोना 6,300 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को छू सकता है। इससे पहले बैंक ने 4,500 डॉलर का अनुमान दिया था। इस तेजी के पीछे का मुख्य कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही सोने की ताबड़तोड़ खरीदारी और बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड का हिस्सा बढ़ाना बताया जा रहा है।
क्यों बढ़ रही है सोने की डिमांड?
इस साल अब तक स्पॉट गोल्ड की कीमतों में लगभग 20% की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे तीन मुख्य कारक काम कर रहे हैं:
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भू-राजनीतिक तनाव: वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता निवेशकों को 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven) की ओर धकेल रही है।
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ब्याज दरों में कटौती: जब ब्याज दरों में कमी की उम्मीद होती है, तो बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने का आकर्षण बढ़ जाता है।
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रिकॉर्ड स्तर: जनवरी में सोना पहले ही अपने रिकॉर्ड स्तर को छू चुका है और हाल ही में यह तीन हफ्ते के उच्च स्तर पर बना हुआ है।
चांदी की चाल: 'पहले सुस्ती, फिर बड़ी मस्ती'
चांदी को लेकर बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) का नजरिया थोड़ा अलग लेकिन उम्मीदों से भरा है। बैंक के अनुसार, शॉर्ट टर्म में चांदी की कीमतों में थोड़ी कमजोरी या दबाव देखा जा सकता है क्योंकि फिलहाल यह अपने रिकॉर्ड हाई से नीचे ट्रेड कर रही है। हालांकि, लंबी अवधि की तस्वीर बेहद सुनहरी है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल के दौरान चांदी एक बार फिर 100 डॉलर प्रति औंस के पार जा सकती है। इसके पीछे इंडस्ट्रियल डिमांड (औद्योगिक मांग) और खासकर ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी के बढ़ते इस्तेमाल को बड़ी वजह माना जा रहा है।