Edited By Radhika,Updated: 25 Mar, 2026 12:14 PM

4745 दिनों तक मशीनों पर जिंदगी गुजारने के बाद हरीश राणा की कल एम्स में मृत्यु हो गई है। भारत के न्यायिक और चिकित्सा इतिहास में 'गरिमापूर्ण मृत्यु' के अधिकार का प्रतीक बने हरीश राणा को आज सुबह नम आंखों के बीच अंतिम विदाई दी गई। बुधवार सुबह 9 बजे...
Harish Rana Death: 4745 दिनों तक मशीनों पर जिंदगी गुजारने के बाद हरीश राणा की कल एम्स में मृत्यु हो गई है। भारत के न्यायिक और चिकित्सा इतिहास में 'गरिमापूर्ण मृत्यु' के अधिकार का प्रतीक बने हरीश राणा को आज सुबह नम आंखों के बीच अंतिम विदाई दी गई। बुधवार सुबह 9 बजे दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान परिवार, मित्रों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
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13 साल बाद खत्म हुआ जिंदगी और मौत का सफर
गाजियाबाद निवासी हरीश राणा का जीवन साल 2013 में एक दर्दनाक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गया था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान हुए एक एक्सीडेंट के बाद वे कोमा जैसी स्थिति (Persistent Vegetative State) में चले गए थे। बीते 13 वर्षों से उनके माता-पिता और भाई ने उन्हें वापस लाने के लिए हर मुमकिन दरवाजा खटखटाया, लेकिन चिकित्सकीय रूप से कोई सुधार संभव नहीं हो सका।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
जब जीवन केवल मशीनों और पाइपों तक सिमट कर रह गया, तब परिवार ने अपने बेटे को इस असहनीय पीड़ा से मुक्ति दिलाने के लिए न्यायपालिका का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए हरीश को 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दी। भारत में इस कानूनी प्रक्रिया के तहत गरिमापूर्ण विदाई पाने वाले हरीश राणा पहले व्यक्ति बने।
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AIIMS में पूरी हुई विदाई की प्रक्रिया
अदालत के आदेशानुसार, हरीश को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया था। यहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम की कड़ी निगरानी में उनके जीवनरक्षक उपकरणों (Life Support) को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया पूरी की गई। मंगलवार को हरीश ने अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली, जिसके साथ ही उनके 13 साल लंबे कष्टदायक सफर का अंत हुआ।
समाज के लिए एक मिसाल
हरीश राणा का मामला केवल एक व्यक्तिगत क्षति नहीं है, बल्कि यह 'सम्मान के साथ मरने के अधिकार' पर एक बड़ी कानूनी नजीर पेश करता है। अंतिम संस्कार के वक्त मौजूद लोगों का कहना था कि परिवार ने इन 13 सालों में जो धैर्य और समर्पण दिखाया, वह अतुलनीय है।