Edited By Rohini Oberoi,Updated: 20 Mar, 2026 04:15 PM

भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच शुरू हुई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसने यात्रियों के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है। इस ट्रेन की कैटरिंग और...
Vande Bharat Sleeper Luxury Interior Viral : भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच शुरू हुई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसने यात्रियों के अनुभव को पूरी तरह बदल दिया है। इस ट्रेन की कैटरिंग और साफ-सफाई को देखकर लोग इसकी तुलना 'फ्लाइट' की बिजनेस क्लास से कर रहे हैं।
फ्लाइट जैसा खाना और ट्रॉली सर्विस
ट्रैवल ब्लॉगर आदित्य यादव द्वारा साझा किए गए वीडियो में रेलवे का स्टाफ बिल्कुल प्रोफेशनल अंदाज में नजर आ रहा है। खाना परोसने वाले स्टाफ ने मास्क, ग्लव्स और हेयरनेट पहने हुए हैं। यात्रियों को खाना परोसने के लिए ढकी हुई नीली ट्रॉलियों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसमें खाना पूरी तरह सीलबंद (Sealed) और सुरक्षित है। बदला हुआ अंदाज: पहले की ट्रेनों में होने वाली अस्त-व्यस्त सर्विस के मुकाबले यह तरीका बेहद व्यवस्थित और साफ-सुथरा लग रहा है।
विदाई हुई मुर्दाघर जैसी सफेद चादरों की
अक्सर एसी कोच में मिलने वाली सफेद चादरों को लेकर यात्री शिकायत करते थे कि इससे कोच का माहौल किसी अस्पताल या मुर्दाघर जैसा लगता है लेकिन वंदे भारत स्लीपर में इसे बदल दिया गया है। यात्रियों को अब खूबसूरत ब्लॉक-प्रिंट वाली रंगीन बेडशीट्स दी जा रही हैं जो कोच को एक होमली और लग्जरी लुक देती हैं।
वंदे भारत स्लीपर की 5 बड़ी खूबियां
इसकी डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है जो लंबी दूरी के सफर को घंटों कम कर देती है। (हावड़ा-गुवाहाटी के बीच 2.5 घंटे की बचत)। 16 डिब्बों वाली इस ट्रेन में फर्स्ट, सेकंड और थर्ड एसी की व्यवस्था है जिसमें कुल 800 यात्री सफर कर सकते हैं। ट्रेन में स्वदेशी कवच तकनीक और इमरजेंसी टॉक-बैक सिस्टम लगा है जिससे सफर बेहद सुरक्षित है। ट्रेन के अंदर की लाइटिंग और सीटों की बनावट को थकान मिटाने के लिहाज से डिजाइन किया गया है। हाई-टेक इंसुलेशन के कारण ट्रेन के अंदर बाहर का शोर और झटके महसूस नहीं होते।
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यात्रियों का रिएक्शन
इंटरनेट पर लोग इस बदलाव की जमकर तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "अब लगता है कि हम वाकई 21वीं सदी के भारत में सफर कर रहे हैं।" वहीं दूसरे ने कहा, "अगर ऐसी सर्विस मिले तो फ्लाइट की क्या जरूरत?"