Edited By Pardeep,Updated: 22 Jun, 2026 11:33 PM

भगवान हनुमान की जन्मस्थली को लेकर पिछले कई वर्षों से जारी विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक जा पहुंचा है। हनुमान जी का जन्म कहां हुआ था, इसे लेकर दो बड़े ट्रस्टों के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की...
नेशनल डेस्कः भगवान हनुमान की जन्मस्थली को लेकर पिछले कई वर्षों से जारी विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत तक जा पहुंचा है। हनुमान जी का जन्म कहां हुआ था, इसे लेकर दो बड़े ट्रस्टों के बीच कानूनी लड़ाई चल रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज करते हुए फिलहाल इसे हाई कोर्ट के विवेक पर छोड़ दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने दलील दी थी कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने पहले फैसला सुरक्षित रखा था और फिर उसे खुली अदालत में सुनाया भी था, लेकिन अब अचानक इस मामले को फिर से सुनवाई के लिए लिस्ट कर दिया गया है। वकील ने तर्क दिया कि एक बार फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत का अधिकार क्षेत्र खत्म हो जाता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल इस मामले को हाई कोर्ट को ही देखने दें।
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद साल 2021 में तब शुरू हुआ जब भगवान हनुमान के जन्मस्थान को लेकर अलग-अलग धार्मिक संस्थाओं ने अपने-अपने दावे पेश किए। मुख्य रूप से तीन पक्ष अपनी दलीलें दे रहे हैं:
- तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD): आंध्र प्रदेश के इस ट्रस्ट का दावा है कि तिरुमाला की अंजनद्रि पहाड़ी ही हनुमान जी का असली जन्मस्थान है। इसके समर्थन में उन्होंने पुराणों, शिलालेखों और ऐतिहासिक साक्ष्यों का हवाला दिया है।
- श्री हनुमद जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट: कर्नाटक के इस ट्रस्ट का कहना है कि हनुमान जी का जन्म हम्पी (कर्नाटक) के पास स्थित अंजनद्रि पहाड़ी पर हुआ था। उनका यह दावा पौराणिक ग्रंथों के संदर्भों पर आधारित है।
- रामचंद्रपुरा मठ (कर्नाटक): इस विवाद में तीसरा पक्ष रामचंद्रपुरा मठ का है, जिनका तर्क है कि कर्नाटक के तट पर स्थित गोकर्ण ही वह स्थान है जहां हनुमान जी पैदा हुए थे। मठ के अनुसार, किष्किंधा की अंजनद्रि पहाड़ी उनकी 'जन्मभूमि' नहीं बल्कि 'कर्मभूमि' थी।
अब आगे क्या?
फिलहाल यह मामला कर्नाटक हाई कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद अब सभी की नजरें हाई कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं कि क्या ऐतिहासिक और पौराणिक साक्ष्यों के आधार पर इस सदियों पुराने सवाल का समाधान निकल पाएगा।