Edited By Pardeep,Updated: 14 Aug, 2026 01:34 AM

इंटरनेशनल एंटी खालिस्तान टेरेरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड पर हमले के मामले में हुई कुछ गिरफ्तारियों के विरोध में हरियाणा के अंबाला में भयानक हिंसा भड़क उठी है। अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे और जीटी रोड पर करीब सात घंटे तक चले भारी बवाल के बाद...
नेशनल डेस्कः इंटरनेशनल एंटी खालिस्तान टेरेरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड पर हमले के मामले में हुई कुछ गिरफ्तारियों के विरोध में हरियाणा के अंबाला में भयानक हिंसा भड़क उठी है। अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे और जीटी रोड पर करीब सात घंटे तक चले भारी बवाल के बाद आखिरकार पुलिस लाठीचार्ज कर जाम खुलवाने में सफल रही। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के उग्र हमले में अंबाला के डीएसपी (क्राइम) वीरेंदर का हाथ बुरी तरह कट गया और 5 से 6 अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।
पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे से शुरू हुआ विवाद और गिरफ्तारियां
इस पूरे तनाव की पृष्ठभूमि 7 अगस्त को ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब में हुई एक घटना से जुड़ी है। एंटी-खालिस्तान टेरेरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष गुरसिमरन सिंह मंड जब गुरुद्वारा साहिब पहुंचे, तो पार्किंग को लेकर उनका स्थानीय लोगों के साथ विवाद हो गया। मंड का आरोप था कि कुछ निहंगों और उग्र भीड़ ने उन पर डंडों व तेजधार हथियारों से हमला किया और उन्हें बुरी तरह पीटा। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पंजोखरा थाना पुलिस ने सिख समाज के कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर दो लोगों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, सिख संगत की ओर से गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ दी गई शिकायत पर कोई मामला दर्ज नहीं किया गया, जिससे स्थानीय सिख समाज में पुलिस की एकतरफा कार्रवाई को लेकर गहरा असंतोष फैल गया।
तीन बैरिकेड तोड़े, पुलिस पर दागे गए आंसू गैस के गोले
पुलिस कार्रवाई के विरोध में वीरवार को पंजोखरा गुरुद्वारे में सिख संगत की एक पंथ बैठक बुलाई गई, जिसमें हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (एचएसजीएमसी) के प्रधान जगदीश सिंह झींडा और अन्य सदस्य शामिल हुए। बैठक में जीटी रोड को जाम करने का फैसला किया गया, जिसके बाद लोग नारेबाजी करते हुए बाहर निकले। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए गुरुद्वारे के मार्ग पर बैरिकेडिंग की थी, जिसे उग्र प्रदर्शनकारियों ने तोड़ दिया। दूसरे बैरिकेड पर पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के 4 से 5 गोले दागे, लेकिन भीड़ ने उसे भी तोड़ दिया और आगे बढ़ गई। इसके बाद बलदेव नगर के पास तीसरे बैरिकेड को भी प्रदर्शनकारियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। दोपहर करीब एक बजे भीड़ ने जीटी रोड पर कब्जा कर लिया और ट्रैक्टरों तथा कंटेनरों को अड़ाकर मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया।
एचएसजीएमसी प्रधान झींडा घायल, जाम से जनता त्रस्त
एनसीसी स्कूल के सामने पुलिस बैरिकेडिंग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के दौरान बैरिकेड का एक हिस्सा लगने से एचएसजीएमसी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा की कोहनी में चोट आई। जीटी रोड पर लगे इस जाम के कारण पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाले वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं, जिससे हरियाणा का सड़क मार्ग से अन्य राज्यों से संपर्क लगभग टूट गया। दोपहर एक बजे से लगे इस जाम में लोग छह घंटे से भी अधिक समय तक फंसे रहे। स्कूल से छुट्टी के बाद घर जा रहे बच्चों की बसें, एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी इस जाम में घंटों फंसी रहीं। आने-जाने का कोई साधन न होने के कारण आम राहगीरों को कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।
बातचीत विफल होने पर अंधेरे का फायदा उठाकर हमला
जाम की सूचना पाकर मौके पर पुलिस बल के साथ एसपी अंबाला अजीत सिंह शेखावत और आईजी पंकज नैन पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और उनके नेताओं से कई दौर की बातचीत की और उनसे शांतिपूर्ण तरीके से जाम खोलने का आग्रह किया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और गिरफ्तार किए गए दो सिख युवकों को तुरंत रिहा किया जाए।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का इरादा मामला शांतिपूर्वक सुलझाने का नहीं था। जैसे ही शाम को अंधेरा होने लगा, भीड़ में छिपे असामाजिक तत्वों ने भाले, फरसे, तलवारें और कुल्हाड़ियों जैसे घातक हथियारों से पुलिसकर्मियों पर अचानक जानलेवा हमला बोल दिया। इस अप्रत्याशित हमले में डीएसपी क्राइम वीरेंदर का हाथ कट गया और वह लहूलुहान होकर गिर पड़े। इस हमले में 5-6 अन्य पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। हिंसा को काबू में करने के लिए पुलिस को अंततः बल प्रयोग और लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके बाद रात को हाईवे सुचारू किया जा सका।