क्या बंगाल में सत्ता बरकरार रखने में कामयाब होगी टीएमसी?,... या फिर ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी बीजेपी ... फैसला कल

Edited By Updated: 03 May, 2026 06:57 PM

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पश्चिम बंगाल में एक महीने तक विधानसभा चुनाव के लिए धुआंधार प्रचार के बाद अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति के जेहन में फिलहाल एक ही सवाल है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सत्ता बरकरार...

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में एक महीने तक विधानसभा चुनाव के लिए धुआंधार प्रचार के बाद अब सबकी नजरें सोमवार को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति के जेहन में फिलहाल एक ही सवाल है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सत्ता बरकरार रख पाएगी या फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐतिहासिक जीत हासिल करके पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाएगी।

कल सुबह आठ बजे से होगी गिनती 
आप को बता दें कि सुबह आठ बजे मतों की गिनती शुरू होते ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं की धड़कनें और तेज हो जाएंगी। ये तीनों दल 2021 के चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाए थे, लिहाजा पांच साल के वनवास के बाद ये फिर से विधानसभा में अपनी वापसी की बाट जोह रहे हैं। राज्य में 77 केंद्रों पर मतगणना होगी। कड़े सुरक्षा इंतजामों और गरमाए राजनीतिक माहौल के बीच 294 सदस्यों वाली विधानसभा की 293 सीट के परिणाम घोषित किए जाएंगे। भारत निर्वाचन आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी का हवाला देते हुए चुनाव रद्द कर दिया। इस सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा जबकि मतगणना 24 मई को होगी। 

टीएमसी और भाजपा में कांटे की टक्कर की उम्मीद 
गौरतलब है कि राज्य में दो चरण में हुआ चुनाव 29 अप्रैल को संपन्न हुआ। निर्वाचन आयोग के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद बंगाल में इस बार सबसे अधिक 92.47 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अधिकारियों ने कहा कि दक्षिण 24 परगना के 15 बूथ पर पुनर्मतदान शनिवार को संपन्न हुआ, जिसमें लगभग 87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव समाप्त होने के बाद भी राज्य का राजनीतिक माहौल गर्माया रहा, जिसकी वजह से परिणामों की घोषणा से पहले उत्सुकता और बढ़ गई है। दोनों प्रमुख दलों टीएमसी और भाजपा अपनी-अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।

एसआईआर के दौरान 90 लाख से अधिक नाम हटाए जाने का दावा
ढाई लाख से अधिक केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती और पूरी तरह से पुनर्गठित राज्य पुलिस बल की मौजूदगी के चलते चुनाव के दौरान कम से कम हिंसा हुई और हाल के दशकों में राज्य के चुनावी इतिहास में पहली बार हिंसा में किसी की मौत नहीं हुई। पिछले 20 वर्षों में राज्य में हुआ यह पहला ऐसा चुनाव भी था, जो एक व्यापक लेकिन विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कवायद के बाद हुआ। एसआईआर के दौरान मतदाता सूची को संशोधित करते हुए 90 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे। सभी दलों के चुनावी भाग्य पर इस कवायद का क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

टीएमसी विकास कार्यों पर जीत का भर रही दम 
विश्लेषक मतदाताओं की संभावित पसंद को समझने के लिए रात-दिन चर्चा कर रहे हैं और जनता भी इस बात को लेकर बेहद उत्साहित है कि चुनाव का परिणाम क्या होगा। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे शीर्ष नेताओं ने टीएमसी पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, घुसपैठ, महिलाओं की सुरक्षा और बेरोजगारी को लेकर तीखे हमले किए, साथ ही कल्याणकारी योजनाएं लागू करने का वादा भी किया। टीएमसी की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी ने पलटवार किया। उन्होंने एसआईआर के दौरान कथित उत्पीड़न, बंगालियों के साथ भेदभाव और "बाहरी" होने के मुद्दे पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने भाजपा पर राष्ट्रीय स्तर पर अपने वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया गया, साथ ही टीएमसी के विकास कार्यों का बार-बार जिक्र किया। चुनाव के लिए मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को हुआ। कुल 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान के पात्र थे।

मतगणना शांतिपूर्ण होगा अधिकारियो का दावा 
निर्वाचन आयोग ने इस वर्ष मतगणना केंद्रों की संख्या घटाकर 77 कर दी है, जो पहले घोषित 87 और 2021 के 108 केंद्रों की तुलना में कम है। इसके अलावा मतगणना के लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "मतगणना शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।" हालांकि, मतगणना से पहले का समय राजनीतिक नाटकीयता से भरा रहा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी नेता कोलकाता के स्ट्रांगरूम पहुंचे, मतगणना में गड़बड़ी की आशंका जताई और सीलबंद ईवीएम से छेड़छाड़ के प्रयासों का आरोप लगाया। निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी ईवीएम कड़ी निगरानी में, चौबीस घंटे सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी के तहत रखी गई हैं। 

भवानीपुर सीट पर सभी की नजरें 
वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा, "स्ट्रांगरूम तीन-स्तरीय सुरक्षा प्रणाली के तहत सुरक्षित हैं, और उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों को प्रोटोकॉल के अनुसार निगरानी की अनुमति है। किसी भी तरह की छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है।" मतगणना की तारीख नजदीक आने के साथ ही स्ट्रांगरूम के बाहर सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। प्रक्रिया की निगरानी तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। कोलकाता के 11 विधानसभा क्षेत्रों की मतगणना पांच स्थानों बालीगंज गवर्नमेंट हाई स्कूल, बाबा साहेब आंबेडकर एजुकेशन यूनिवर्सिटी, सखावत मेमोरियल स्कूल, नेताजी इंडोर स्टेडियम और सेंट थॉमस बॉयज स्कूल में की जाएगी। भवानीपुर सीट पर सभी की नजरें हैं, जहां ममता बनर्जी और भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है। इस विधानसभा क्षेत्र में डाले गए मतों की गिनती सखावत मेमोरियल केंद्र में होगी।

क्यूआर कोड के माध्यम से मतगणना केंद्र के अंदर मिलेगी एंट्री
निर्वाचन आयोग ने कड़े प्रवेश नियंत्रण उपाय लागू किए हैं, जिसके तहत केवल उसके ईसीआईनेट सिस्टम के माध्यम से जारी क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र से ही प्रवेश की अनुमति होगी। निर्वाचन अधिकारी और पर्यवेक्षकों को छोड़कर कोई भी मतगणना केंद्र के अंदर मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेगा। उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय बलों की तैनाती को चुनौती देने वाली टीएमसी की याचिका पर अतिरिक्त निर्देश देने से शनिवार को इनकार कर दिया। 

294 सीटों पर हुए है चुनाव 
चुनाव में टीएमसी ने 291 सीट पर और अनित थापा के नेतृत्व वाले सहयोगी दल भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) ने दार्जिलिंग के पहाड़ी क्षेत्र में तीन सीट पर उम्मीदवार उतारे। भाजपा, कांग्रेस और वाम मोर्चा ने सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि हुमायूं कबीर की एजेयूपी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम जैसी पार्टियों ने भी कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे। भाजपा की ओर से दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, रूपा गांगुली और निशित प्रमाणिक जैसे नेता मैदान में हैं, जबकि टीएमसी के प्रमुख उम्मीदवारों में फिरहाद हकीम, कुणाल घोष, मदन मित्रा और उदयन गुहा शामिल हैं।
 

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