अकाल तख्त में पेश होने वाले चौथे मुख्यमंत्री बने भगवंत मान, जानें किस CM को क्या मिली थी सजा

Edited By Updated: 15 Jan, 2026 12:16 PM

bhagwant mann became the fourth chief minister to appear before the akal takht

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज (15 जनवरी) अमृतसर में सिखों के सर्वोच्च तख्त

अमृतसर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज (15 जनवरी) अमृतसर में सिखों के सर्वोच्च तख्त श्री अकाल तख़्त साहिब के समक्ष पेश होंगे। वह ऐसे चौथे मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें अकाल तख़्त ने तलब किया है। उनसे पहले भीम सेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल अकाल तख़्त के सामने पेश हो चुके हैं। मुख्यमंत्री मान को अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने गुरुओं के दसवंध के सिद्धांत, गुरु की गोलक से जुड़ी टिप्पणियों और एक आपत्तिजनक वीडियो को लेकर स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है। मुख्यमंत्री मान एक आम सिख के रूप में नंगे पांव अकाल तख़्त साहिब पहुंचेंगे।

पहले भी तीन मुख्यमंत्री हो चुके हैं पेश
जानिए, किस मुख्यमंत्री को क्यों किया गया था तलब
1. भीम सेन सच्चर (1955):

अविभाजित पंजाब के दूसरे मुख्यमंत्री भीम सेन सच्चर 18 सितंबर 1955 को अकाल तख़्त के सामने पेश हुए थे। पंजाबी सूबा आंदोलन के दौरान दरबार साहिब परिसर में पुलिस कार्रवाई और आंसू गैस चलवाने के आरोप लगे थे। उन्होंने लिखित में माफी मांगी, जिसे स्वीकार करते हुए उन्हें जूते और बर्तन साफ करने की धार्मिक सेवा दी गई। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

2. सुरजीत सिंह बरनाला (1988):
ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान दरबार साहिब में पुलिस भेजने और अकाल तख़्त के आदेश न मानने के आरोप में उन्हें ‘तनखैया’ घोषित किया गया। करीब डेढ़ साल तक वे पंथ से निष्कासित रहे। माफी के बाद उन्हें गले में तख्ती डालकर बैठने, जूते-बर्तन साफ करने और धार्मिक कोष में दान देने की सजा मिली।

3. प्रकाश सिंह बादल (1979):
निरंकारी विवाद और अकाली दल की अंदरूनी कलह के चलते उन्हें अकाल तख़्त ने तलब किया था। उन्होंने अपनी गलतियां स्वीकार कीं और धार्मिक सेवा के तहत जूते साफ किए व बर्तन मांजे।

CM भगवंत मान को धार्मिक सजा नहीं
मुख्यमंत्री भगवंत मान पर आरोप है कि उन्होंने दसवंध और गुरुद्वारों की गोलक के कथित दुरुपयोग को लेकर सार्वजनिक टिप्पणियां कीं, जिन्हें सिख सिद्धांतों के खिलाफ माना गया। इसके अलावा एक वायरल वीडियो को भी सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया।हालांकि, अकाल तख़्त की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री मान को कोई धार्मिक सजा नहीं दी जाएगी, क्योंकि अकाल तख़्त उन्हें पूर्ण सिख नहीं मानता। उनसे केवल स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

 

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