अंग प्रत्यारोपण के लिए मरीज देश के किसी भी राज्य में अपना पंजीकरण करा सकते हैं : सरकार

Edited By Updated: 15 Mar, 2023 09:52 AM

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नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि अंग प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों के पंजीकरण के लिए राज्य के मूल निवासी होने की शर्त को हटा दिया गया है और अब वे देश के किसी भी राज्य में अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि अंग प्रत्यारोपण की जरूरत वाले मरीजों के पंजीकरण के लिए राज्य के मूल निवासी होने की शर्त को हटा दिया गया है और अब वे देश के किसी भी राज्य में अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के परामर्श से अंग दान और प्रत्यारोपण के लिए ‘‘एक राष्ट्र, एक नीति’’ के उद्देश्य से काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में मृतक दाता से अंग प्रत्यारोपण की आवश्यकता रखने वाले मरीजों के पंजीकरण के लिए राज्य के मूल निवासी होने की अपेक्षा को हटाने का निर्णय लिया गया है। अब ऐसे मरीज देश के किसी भी राज्य में जाकर अंग प्रत्यारोपण के लिए अपना पंजीकरण करा सकेंगे।’’
मंत्री ने कहा कि नए दिशानिर्देशों के अनुसार, मृत-दाता के अंग प्राप्त करने हेतु पंजीकरण की खातिर पात्रता के लिए 65 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा को हटा दिया गया है। अब, किसी भी उम्र का व्यक्ति मृत-दाता के अंग प्राप्त करने के लिए पंजीकरण करा सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने मानव अंगों और ऊतकों का प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 अधिनियमित किया है और मानव अंगों और ऊतकों के प्रत्यारोपण नियम, 2014 को अधिसूचित किया है। उपर्युक्त अधिनियम और नियमों में देश में अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए व्यापक एकसमान नीति का प्रावधान है। अधिनियम और नियम सभी संघ राज्य क्षेत्रों में लागू है और आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, कर्नाटक, मेघालय और त्रिपुरा राज्यों को छोड़कर अनुच्छेद 252 (1) के तहत सभी राज्यों द्वारा अपनाए गए हैं।



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