ठंड से बचने के लिए जलाई अंगीठियां बन रहीं लोगों की मौत का कारण

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 04:28 AM

the braziers lit to ward off the cold are becoming the cause of people s deaths

इन दिनों देश के अनेक भागों में कड़ाके की ठंड पडऩे से तापमान शून्य से भी नीचे चला गया है। ऐसे में ताप के लिए चंद लोग कमरों में अंगीठी जला कर सोने के कारण जहरीला धुआं चढऩे से मृत्यु के शिकार हो रहे हैं।

इन दिनों देश के अनेक भागों में कड़ाके की ठंड पडऩे से तापमान शून्य से भी नीचे चला गया है। ऐसे में ताप के लिए चंद लोग कमरों में अंगीठी जला कर सोने के कारण जहरीला धुआं चढऩे से मृत्यु के शिकार हो रहे हैं।
कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी जला कर रखने से ‘ऑक्सीजन’ की कमी हो जाती है और ‘कार्बन मोनोआक्साइड’ सीधे दिमाग पर असर डालती है, जो सांस के जरिए पूरे शरीर में फैल जाती है। इससे शरीर में ‘हीमोग्लोबिन’ कम हो जाने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। इसी कारण पिछले लगभग 2 सप्ताह में हुई ऐसी दर्दनाक मौतों की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : 

* 27 दिसम्बर, 2025 को ‘छपरा’ (बिहार) में ठंड से बचने के लिए एक कमरे में अंगीठी जलाकर सो रहे 3 बच्चों और उनकी नानी की दम घुटने से मृत्यु हो गई तथा परिवार के 3 अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो गए। इस घटना में मारे गए तीनों बच्चे रिश्ते में भाई-बहन थे जो सर्दी की छुट्टिïयों में ननिहाल आए हुए थे। 

* 31 दिसम्बर, 2025 को ‘गयाजी’ (बिहार) के ‘कुर्किहार’ गांव में कमरे के भीतर ठंड से बचने के लिए दरवाजा और खिड़की बंद करके अंगीठी जला कर सो रहे ‘सुजीत कुमार’ और ‘अंशु कुमारी’ नामक भाई-बहन तथा उनकी नानी ‘मीना देवी’ की दम घुटने से मौत हो गई। 
* 8 जनवरी, 2026 को ‘तरनतारन’ (पंजाब) में ‘गुरमीत सिंह’ तथा उनकी पत्नी ‘जसबीर कौर’ की ठंड से बचने के लिए जला कर कमरे में रखी लकडिय़ों की गैस से दम घुटने के कारण मौत हो गई।
* 8 जनवरी, 2026 को ही ‘पटौदी’ (हरियाणा) में ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी सुलगा कर सोना एक श्रमिक के परिवार पर आफत बन कर टूटा तथा दम घुटने से एक 11 वर्षीय बच्ची की मृत्यु एवं परिवार के 3 अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हो गए।
* 9 जनवरी, 2026 को ‘हजारीबाग’ (झारखंड) के ‘बानादाग’ गांव में कड़ाके की ठंड से बचने के लिए कमरे में अंगीठी जलाकर सो रहे दम्पति की दम घुटने से जान चली गई।
* 9 जनवरी, 2026  को ही ‘कोडरमा’ (झारखंड) के ‘पूरना नगर’ में ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में कोयला जला कर सो रहे पति-पत्नी ‘वीरेंद्र शर्मा’ और ‘कांति देवी’ की दम घुटने से मौत हो गई। 

* 9 जनवरी, 2026 को ही ‘उत्तर काशी’ (उत्तराखंड) के ‘चाम्पकोट’ में कमरे में जल रही अंगीठी की गैस के कारण एक युवक की मृत्यु हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से बीमार हो गया।
* 10 जनवरी, 2026 को ‘आरा’ (बिहार) के ‘छोटकी सिंगरी’ गांव में एक कमरे में अपने माता-पिता और बहन के साथ ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाकर सो रहे 12 वर्षीय बच्चे ‘बजरंगी सिंह’ की मौत हो गई जबकि उसके माता-पिता और बहन गंभीर रूप से बीमार हो गए। 
* और अब 11 जनवरी, 2026 को ‘तरनतारन’ (पंजाब) में ठंड से बचने के लिए अंगीठी जलाकर सो रहे ‘अर्शदीप सिंह’ (20), उसकी पत्नी ‘जशनदीप कौर’ (19) तथा 2 महीने के मासूम बेटे ‘गुरबाज  सिंह’ की दम घुटने से मौत हो गई और ‘अर्शदीप सिंह’ का साला ‘किशन सिंह’ बेहोश हो गया। उक्त सब घटनाओं का सबक यही है कि बंद कमरे में अंगीठी नहीं जलानी चाहिए और यदि जलानी ही पड़े तो सोने से पहले उसे बुझा देना चाहिए ताकि धुआं पैदा न हो। इसके अलावा सोते समय खिड़की और रोशनदान भी कुछ खुले रखने चाहिएं। ये छोटी-छोटी परंतु महत्वपूर्ण सावधानियां अपना कर हम इस प्रकार की दुर्घटनाओं से बच सकते हैं। प्रशासन को भी चाहिए कि इस बारे लोगों को जागरूक करे, ताकि इस तरह की दर्दनाक और असामयिक मौतों के परिणामस्वरूप परिवार तबाह होने से बच सकें।—विजय कुमार 

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