Edited By Niyati Bhandari,Updated: 04 Mar, 2026 11:55 AM

भारत के विभिन्न हिस्सों में जहां होली को रंगों और पानी की बौछारों के साथ मनाया जाता है, वहीं महाराष्ट्र के बीड जिले के विदा गांव के लोग 90 साल पुरानी परंपरा को कायम रखे हुए हैं, जिसके तहत दामाद के लिए एक गधे की सवारी का आयोजन किया जाता है।
बीड (प.स.): भारत के विभिन्न हिस्सों में जहां होली को रंगों और पानी की बौछारों के साथ मनाया जाता है, वहीं महाराष्ट्र के बीड जिले के विदा गांव के लोग 90 साल पुरानी परंपरा को कायम रखे हुए हैं, जिसके तहत दामाद के लिए एक गधे की सवारी का आयोजन किया जाता है।
यह अनोखी परंपरा त्यौहार से कुछ दिन पहले शुरू होती है, जिसे स्थानीय लोग दामाद की तलाश कहते हैं। इस वर्ष यह ‘सम्मान” शिवाजी गलफड़े को मिला, जो मूल रूप से कैज तहसील के डोंगांव निवासी हैं।
यहां एक निवासी ने कहा, ‘यह परंपरा लगभग नौ दशक पुरानी है और इसकी शुरूआत अनंतराव देशमुख नाम के एक ग्रामीण ने की थी। अपने दामाद को गधे पर बिठाकर घुमाने के एक हल्के-फुल्के मज़ाक के रूप में शुरू हुई यह परंपरा धीरे-धीरे पूरे गांव के लिए बेसब्री से प्रतीक्षित एक वार्षिक अनुष्ठान में बदल गई।’ होली या धुलीवंदन की सुबह ढोल की थाप और रंगों की बौछार के बीच दामाद को गधे पर बैठाया जाता है। पुराने जूतों की माला पहनाकर उसे गांव की गलियों में घुमाया जाता है।