Edited By ,Updated: 04 Apr, 2026 03:11 AM

नेपाल की बालेन सरकार एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रही है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से खुली जंग के साथ सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। इस बीच बालेन सरकार के वित्त मंत्री स्वर्णम बाग्ले की काठमांडू में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से...
नेपाल की बालेन सरकार एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रही है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से खुली जंग के साथ सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। इस बीच बालेन सरकार के वित्त मंत्री स्वर्णम बाग्ले की काठमांडू में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात भी चर्चा में है। इस मुलाकात की चर्चा इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि यह परंपरा से थोड़ी हटकर थी। परंपरा यह रही है कि जब भी नेपाल में सत्ता परिवर्तन होता है तो सर्वप्रथम भारतीय राजदूत से पहली मुलाकात विदेश मंत्री अथवा प्रधानमंत्री की होती थी। यद्यपि भारतीय राजदूत और नेपाल के वित्त मंत्री की यह मुलाकात बेहद गोपनीय रही, फिर भी इस मुलाकात के तरह-तरह के मायने निकाले जाने लाजिमी हैं। इस मुलाकात की एक बात यह भी हो सकती है कि चुनाव में भारत ने नेपाल को भारतीय 800 करोड़ की अनुदान राशि उपलब्ध कराई थी।
जहां तक बालेन सरकार के भ्रष्ट राजनेताओं पर शिकंजा कसने की बात है तो वह केवल के.पी. शर्मा ओली, रमेश लेखक, महेश बस्नेत और पूर्व ऊर्जा मंत्री की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है। एमाले के अन्य नेता भी निशाने पर हैं। नेपाली कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा सहित इस पार्टी के अन्य नेता भी भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे हुए हैं। माओवादी केंद्र के अध्यक्ष पूर्व पी.एम. प्रचंड और पूर्व पी.एम. बाबू राम भट्टराई पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं। पूर्व पी.एम. शेर बहादुर देउबा सपत्नी अभी भारत में थे, अब उनके थाइलैंड में होने की चर्चा है, शायद किसी बीमारी के इलाज के सिलसिले में। ऐसा माना जा रहा है कि कुछ नेपाली नेता भारत में छुपे हैं। भारतीय राजदूत और नेपाली वित्त मंत्री के बीच मुलाकात में यह भी चर्चा का विषय हो सकता है।
बालेन सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में जिलाधिकारी स्तर के एकाध नेपाली अफसर भी सलाखों के पीछे हुए हैं। इसके बाद अभी मनी लांड्रिंग मामले में जो एक बड़े व्यवसायी की गिरफ्तारी हुई है, उससे व्यवसाय की आड़ में अवैध तरीके से धन अर्जन का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इससे काठमांडू अथवा नेपाल में कहीं भी व्यवसाय की आड़ में लूट-खसूट करने वाले सफेदपोशों में दहशत फैल गई है। गिरफ्तार किए गए दीपक भट्ट नाम के व्यवसायी की जो पृष्ठभूमि सामने आई है वह काफी चौंकाने वाली है। यह कि नेपाल जैसे छोटे देश में भी भ्रष्टाचार की जड़ें इतने गहरे तक हैं।
नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा के चुनाव क्षेत्र डोडुलधुरा के रहने वाले दीपक भट्ट का संबंध नेपाली कांग्रेस के नेताओं के अलावा हर पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्रियों से काफी निकट के रहे हैं। एक से बढ़कर एक काले कारनामों से लैस इस व्यवसायी की जब कुंडली खंगाली गई तो प्याज के छिलके की तरह भ्रष्टाचार से जुड़े उसके ढेर सारे कारनामें सामने आने लगे। इनमें एक तो यह भी कि डाक्टर बाबू राम भट्टराई से उसके तार बहुत मजबूती से जुड़े हुए थे, जब वह प्रधानमंत्री थे। बाबूराम भट्टराई से उसकी मुलाकात सत्तारूढ़ दल के एक सांसद ने कराई थी, जब वह नेपाली कांग्रेस में थे। डाक्टर बाबू राम भट्टराई बहुत ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री नहीं रहे लेकिन जितने दिन भी थे, सत्ता के गलियारे में दीपक भट्ट की तूती बोलती थी। दीपक भट्ट ने अपनी एक कंपनी के मार्फत बड़ा व्यावसायिक साम्राज्य खड़ा कर लिया था। नेपाल पुलिस को हथियार सप्लाई की दलाली में भी इसके हाथ सने हुए पाए गए।
44 वर्षीय दीपक भट्ट काठमांडू के सानेपा क्षेत्र में रहता है। काठमांडू का यह क्षेत्र दिल्ली के लुटियंस जोन की तरह चॢचत राजनीतिक गलियारा है। यहां राजनीतिक दलों के कार्यालय और नेताओं के आवास हैं। पिछले दो दशक से इस शख्स की हैसियत इतनी थी कि यह न केवल गठबंधन दलों की सरकार बनाने-बिगाडऩे की कुव्वत रखता था, संसद की राज्य व्यवस्था और सार्वजनिक लेखा समिति तक को प्रभावित करता था। दीपक भट्ट के खिलाफ वित्त मंत्रालय ने गोपनीय जांच के आदेश दिए थे और जब उसके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटा लिए गए, तब 2 अप्रैल को उसे काठमांडू के नक्शाल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। सी.बी.आई. के प्रवक्ता शिव कुमार श्रेष्ठ द्वारा उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि करते ही नेपाल के सफेदपोश अपराधियों में खलबली मच गई।
दीपक भट्ट इस समय ‘इन्फिनिटी होल्डिंग्स’ नामक एक कंपनी का प्रमुख डायरैक्टर है। आरोप है कि वह सत्ता की गठजोड़ से इसी कंपनी के माध्यम से उसने जलविद्युत, हथियार, हैलिकॉप्टर समेत विभिन्न विदेशी कंपनियों के एजैंट के रूप में काम करते हुए अवैध कारोबार का विशाल साम्राज्य खड़ा कर लिया। दीपक भट्ट का नेपाल के ट्रैवल एजैंसी, होटल, रियल एस्टेट, कंसल्टैंसी, बीमा और लघु वित्त जैसे क्षेत्रों में भी सीधी और परोक्ष संलिप्तता बताई जाती है। सरकार ने उसके खिलाफ संपत्ति शुद्धीकरण मामले में विस्तृत जांच शुरू की थी, जिसके तहत अध्यागमन विभाग ने उसे काली सूची में डालते हुए उसकी विदेश यात्रा पर रोक लगा दी थी। फिलहाल, भट्ट, उसकी कंपनी और उससे जुड़ी सभी संपत्तियों की गहन जांच जारी है। तय है कि यह सब कर बालेन अपनी नई छवि भी गढऩा चाहते हैं। भ्रष्टाचार से लड़ाई दुनिया के किसी भी देश में आसान नहीं रही लेकिन अगर बालेन इसमें सफलता पा लेते हैं तो नेपाल के भविष्य के लिए यह बहुत अच्छा होगा।-यशोदा श्रीवास्तव