पाकिस्तान में सत्ता हथियाना एक खूनी खेल

Edited By Updated: 13 May, 2023 04:25 AM

grabbing power in pakistan is a bloody game

आज पाकिस्तान कहां खड़ा है? इस्लामाबाद के बारे में कोई भविष्यवाणी करना मुश्किल है। अगर हम वहां की मौजूदा गतिविधियों को गम्भीर से देखें तो। समस्याएं तब शुरू हुईं जब पाकिस्तान के अद्र्धसैनिक बलों ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर में बुल्डोजर चला दिया...

आज पाकिस्तान कहां खड़ा है? इस्लामाबाद के बारे में कोई भविष्यवाणी करना मुश्किल है। अगर हम वहां की मौजूदा गतिविधियों को गम्भीर से देखें तो। समस्याएं तब शुरू हुईं जब पाकिस्तान के अद्र्धसैनिक बलों ने इस्लामाबाद उच्च न्यायालय परिसर में बुल्डोजर चला दिया और भ्रष्टाचार के आरोपों में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार कर लिया। जैसा कि कहा जाता है इमरान खान के खिलाफ विभिन्न मामलों के 120 मामले दर्ज हैं। हाईकोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह की जमानत दे दी है। 

70 वर्षीय क्रिकेटर से नेता बने इमरान की गिरफ्तारी शक्तिशाली पाक सेना द्वारा खान पर आई.एस.आई. के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ निराधार आरोप लगाने के एक दिन बाद हुई थी। संयोग से टी.वी. फुटेज में रेंजर्स ने खान को कॉलर से पकड़कर वैन में डालते हुए दिखाया। इसके बाद इमरान की पार्टी पी.टी.आई. के समर्थकों ने देश भर के शहरों और कस्बों की सड़कों पर एक सदमे और विस्मयकारी प्रतिक्रिया दिखाई। जिसमें सेना के सामान्य मुख्यालय पर हमला भी शामिल था। 

इमरान की गिरफ्तारी का समाचार फैलते ही पाकिस्तान के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी ङ्क्षहसक हो गए और उन्होंने पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक सम्पत्ति को भी नुक्सान पहुंचाया। पहली बार खान के समर्थकों ने रावलपिंडी में सेना के मुख्यालय के मुख्य द्वार को तोड़ दिया। जहां सैनिकों ने संयम बरता। लाहौर में बड़ी संख्या में पी.टी.आई. कार्यकत्र्ताओं ने कोर कमांडर के आवास पर धावा बोल दिया और गेट तथा खिड़की के शीशे तोड़ दिए। वहां सेना के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की जिन्होंने उन्हें घेर लिया और नारेबाजी की। 

सिंध प्रांत में कराची और हैदराबाद तथा ब्लोचिस्तान के क्वेटा में भी ङ्क्षहसक विरोध फैल गया जहां पी.टी.आई. के प्रदर्शनकारी छावनी क्षेत्र के बाहर इकट्ठे हुए। पाकिस्तानी सेना अपने तीन संवेदनशील मामलों पर अपने पूर्व आश्रित के खिलाफ हो गई। पहले स्थान पर इमरान खान ने अपने पंसदीदा आई.एस.आई. प्रमुख फैज हमीद को अगला सेना प्रमुख नियुक्त करने की कोशिश की। दूसरा उन्होंने चीनी प्रतिष्ठान के करीब आने की कोशिश की। पाकिस्तान सेना को यह सब रास नहीं आया।  

तीसरा यह कि देश की अर्थव्यवस्था बद से बदत्तर हो गई थी। सेना खुद को आग की रेखा से बाहर रखना चाहती थी। कितना पेचीदा मामला था जब इमरान खान ने सेना पर बिना कोई सबूत दिए उन्हें मारने की साजिश रचने का आरोप लगाया। इसके विपरीत इमरान खान की अल-कादिर यूनिवर्सिटी ट्रस्ट नामक एक एन.जी.ओ. से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। जिसमें केवल दो ट्रस्टी हैं एक इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी। उस पर रियल एस्टेट टाइकून मालिक रियाज से मुनाफा कमाने का आरोप है। 

इस गिनती पर राष्ट्रीय खजाने को नुक्सान 239 मिलियन अमरीकी डालर आंका गया। यह कोई रहस्य नहीं है कि पाकिस्तान आज राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर है। तालिबान और अन्य इस्लामिक कट्टरपंथी समूहों के बढ़ते जाल समान रूप से परेशान करने वाले हैं। पाकिस्तान में सत्ता हथियाना एक खूनी व्यवसाय रहा है और जब संकट की बात आती है तो अल्लाह या लोकतंत्र के नाम पर कोई भी दूसरे को नहीं बख्शता। कोई माने या न माने सच तो यही है कि पाकिस्तान अपनी पैदायश के जंजाल में फंसा हुआ है। विडम्बना यह है कि शासकों ने लोगों की लम्बी परम्पराओं के साथ-साथ सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक लोकाचार को ध्यान में रखे बिना देश के इस्लामीकरण का विकल्प चुना है। 

यह याद किया जा सकता है कि चार दशकों से अधिक समय तक इस्लामाबाद अमरीकी सैन्य गठबंधन का हिस्सा रहा था। परिचालन स्तर पर यह साम्यवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगेरहा है। इसने इसे अफगान संकट में उलझा दिया। यह तालिबानीकरण की प्रक्रिया की शुरूआत थी जिसका प्रभाव बाद में अमरीकियों ने महसूस किया।पाकिस्तान के तालिबानीकरण में बाद में देश के पुराने समीकरणों को उलट दिया। दुर्भाग्य से धार्मिक आतंकवाद का आधिकारिक आङ्क्षलगन ऐसे समय में सामने आया जब पश्चिम में इस तरह की प्रवृत्ति के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा था। यहां तक कि अमरीकी भी इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ आ गए। 

यह समझने की जरूरत है कि पाकिस्तान में एक निर्वाचित सरकार को लगातार सैन्य प्रतिष्ठान के साथ  एक नाजुक संतुलन बनाए रखना पड़ता है। यदि यह हद से ज्यादा बढ़ जाए तो मुसीबतें कई गुणा बढ़ जाती हैं। पाकिस्तान में जो कुछ भी हुआ था वह काफी परेशान करने वाला है। धार्मिक आतंकवाद और इस्लामी कट्टरवाद की ताकतों के लिए कोई और प्रोत्साहन दीर्घावधि में अधिक प्रतिकूल होगा। आज इस्लामाबाद के सामने बड़ी समस्या अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की है। निरक्षरता और अल्प विकास के खिलाफ लड़ाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 

इस्लामिक बम आतंक का संतुलन तो बना सकता है लेकिन यह लोगों को बुनियादी सुविधाएं जैसे  भोजन, पानी, आश्रय और कपड़े नहीं दे सकता। पाकिस्तानी शासकों ने सत्ता को बनाए रखने और दृश्य और अदृश्य विरोधियों को खत्म करने के लिए अक्सर लोगों का इस्लाम और धार्मिक आतंकवाद के नाम पर इस्तेमाल किया है। पाक शासकों को समझने की जरूरत है  कट्टरता एक घातक खेल है। पाकिस्तान आज फायदे की स्थिति में नहीं है और ऐसा तब तक बना रहेगा जब तक कि वह पड़ोसी देशों विशेषकर भारत के साथ शत्रुता और टकराव के अपने तरीके को नहीं बदलता।-हरि जयसिंह
 

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