Edited By Radhika,Updated: 12 Jan, 2026 02:25 PM

कोलकाता में राजनीतिक रणनीतिकार संस्था I-PAC और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। ED ने इस संबंध में SC का दरवाजा खटखटाया है। ED ने कोर्ट में में याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी,...
नेशनल डेस्क: कोलकाता में राजनीतिक रणनीतिकार संस्था I-PAC और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। ED ने इस संबंध में SC का दरवाजा खटखटाया है। ED ने कोर्ट में में याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर जांच में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है पूरा विवाद?
ED के मुताबिक 8 जनवरी 2026 को ₹2,742 करोड़ के कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रतीक जैन के आवास और I-PAC के दफ्तर पर वैधानिक तलाशी ली जा रही थी। एजेंसी का दावा है कि इस घोटाले के करीब 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचे हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भारी पुलिस बल के साथ वहां पहुंचीं और केंद्रीय एजेंसी की कार्यवाही को रोका। ED का कहना है कि पुलिस ने जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल और महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरन अपने कब्जे में ले लिए और करीब दो घंटे तक उन्हें वापस नहीं किया।
ED की मुख्य मांगें-
- CBI जांच: मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।
- FIR पर रोक: ED अधिकारियों के खिलाफ कोलकाता में दर्ज चार 'प्रतिशोधात्मक' एफआईआर पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- सुरक्षा और संरक्षण: एजेंसी के अधिकारियों को भविष्य की कार्रवाई के लिए सुरक्षा दी जाए और जब्त किए गए डिजिटल सबूतों को सील कर फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रखा जाए।
I-PAC और राज्य सरकार का पक्ष
दूसरी तरफ, I-PAC ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। संस्था ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और किसी भी चुनावी डेटा की जब्ती की बात गलत है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है।