यू.पी व पंजाब में रोचक चुनावी मुकाबला देखने को मिलेगा

Edited By Updated: 02 Nov, 2026 05:25 AM

interesting electoral contests will be seen in up and punjab

अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। गठबंधन की तैयारियां चल रही हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा का गठबंधन तय है। सीटों के बंटवारे पर बात जारी है। पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के एक बार फिर लम्बे समय के बाद साथ आने...

अगले साल उत्तर प्रदेश और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। गठबंधन की तैयारियां चल रही हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और सपा का गठबंधन तय है। सीटों के बंटवारे पर बात जारी है। पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के एक बार फिर लम्बे समय के बाद साथ आने की संभावना बन रही है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो देख सकते हैं कि भाजपा की योगी सरकार कानून व्यवस्था के मोर्चे पर सफल है। जबकि अन्य क्षेत्रों में खास सफल नहीं है। यही कारण है कि योगी जी उन चीजों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं जो उन्हें करनी थीं। इसके लिए वह फिर से चुनाव को हिंदू-मुस्लिम की ओर ले जा रहे हैं। यही कारण है कि वह 80-20 की बात करते हैं तो कभी वह सपा को हिंदू विरोधी बता रहे हैं। 

भाजपा ने अपनी जड़ें जमाने के लिए बहुत ङ्क्षहदू-मुस्लिम कर लिया अब उसे अपने काम और सद्भावना पर चुनाव लडऩा चाहिए क्योंकि वोट के लिए लम्बे समय तक देश में 2 समुदायों को एक-दूसरे के प्रति नफरत रखने की प्रवृत्ति नुकसानदेह हो सकती है। और अगर जेन-जी के रवैये और विचारों को देखें तो यह मूर्खता है। चुनाव वाले प्रदेशों के साथ पूरे देश में जनता इस समय महंगाई से त्रस्त है। बेरोजगारी से युवा हताशा में हैं। आम आदमी पेट भरने के लिए जूझ रहा है। भले ही सरकार लोगों को 5 किलो मुफ्त राशन का झुनझुना थमाए है लेकिन इसके अलावा भी आम आदमी को और भी कुछ चाहिए होता है जो उसे उसकी कमाई में नहीं मिल पा रहा है। युवाओं में आक्रोश बिना वजह नहीं है। इसे समझने की जरूरत है। यह आक्रोश कभी धर्मेंद्र प्रधान और कभी ज्ञानेश कुमार के विरोध के रूप में निकल रहा है लेकिन सरकार युवाओं को समझ नहीं पा रही और युवा भी सरकार को अपनी सही समस्याएं अच्छे से समझा नहीं पा रहे। यही सब बातें इस बार उन प्रदेशों में चुनावी मुद्दा रहेंगी जहां चुनाव होने हैं। 

पंजाब में तो खैर मुस्लिम वोट का खास प्रभाव नहीं है। वहां किसानों की समस्याओं, नशा, बढ़ते अपराध मुद्दा हो सकते हैं। शिरोमणि अकाली दल यदि भाजपा के साथ गठबंधन में यहां चुनाव में उतरता है तो किसानों की समस्याएं उनके लिए मुसीबत बन सकती है क्योंकि पंजाब के किसानों में भाजपा की छवि अच्छी नहीं है। आम आदमी पार्टी पंजाब में पांच साल से सत्ता में होते हुए भी जनता में कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाई। नशा और अपराधों को रोकने में बुरी तरह विफल रही है। कांग्रेस पंजाब में पूरे दमखम और सूझबूझ से चुनाव लड़े तो संभवत: सफल हो सकती है। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव अपने पी.डी.ए. के नारे के साथ चुनाव में उतर रहे हैं। एक बात जो मुझे अक्सर कचोटती है, मीडिया और स्वयं मुसलमान भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। उन्हें अक्सर एक दल के साथ जोड़ कर वोट बैंक के रूप में दिखाया जाता है। अखिलेश उत्तर प्रदेश के एक बड़बोले मुस्लिम नेता से मिले तो मीडिया ने कयास लगाना शुरू किया कि असदुद्दीन ओवैसी के डर से मुस्लिम वोट बैंक को अपने साथ रखने के लिए अखिलेश आजम खान से मिले। यह मीडिया और अखिलेश की सोच हो सकती है परंतु मुसलमानों की नहीं क्योंकि वे वोट बैंक नहीं वोटर है। 

अखिलेश यादव को मेहनत बहुत करनी होगी। उनकी पहले ही पांच  साल की सरकार के दौरान उन्होंने कुछ अच्छी शुरूआतें की थीं जैसे प्रदेश में 112 की पुलिस सेवा, एम्बुलैंस सेवा और बिजली आपूॢत में सुधार लेकिन कुछ नेताओं के कारनामों ने सरकार की छवि को उस समय धूमिल किया था। अखिलेश को जनता को आश्वस्त करना होगा कि आगे ऐसा नहीं होगा। दोनों ही प्रदेशों में इस बार चुनाव बहुत रोचक होगा। हर बार की तरह इस बार भी इन चुनावों में जन-मानसिकता कैसी होगी यह महत्वपूर्ण रहेगा। जनता को अपने विवेक के साथ अपने और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रख कर सरकार चुननी है। छोड़ो यारो नफरत की बातें,बीत गई वो काली रातें,अब मिल के देश-प्रदेश को बनाना है, अच्छे लोगों और अच्छी सोच को लाना है।-वकील अहमद 
 

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