आई.टी.सी. रिफंड : ‘पंजाब राइट टू बिजनैस एक्ट’ में अहम कड़ी गायब

Edited By Updated: 29 Jan, 2026 05:53 AM

itc refund a crucial link is missing in the  punjab right to business act

22 सितम्बर, 2025 से जी.एस.टी. दरों में सुधार से आम आदमी को महंगाई से राहत व कारोबारियों के लिए टैक्स सिस्टम और अधिक सरल हुआ है। उद्योगों को इनपुट टैक्स क्रैडिट (आई.टी.सी.) के डिजिटल रिफंड तेज हुए। केंद्र के इन सुधारों को उन राज्यों का समर्थन मिला,...

22 सितम्बर, 2025 से जी.एस.टी. दरों में सुधार से आम आदमी को महंगाई से राहत व कारोबारियों के लिए टैक्स सिस्टम और अधिक सरल हुआ है। उद्योगों को इनपुट टैक्स क्रैडिट (आई.टी.सी.) के डिजिटल रिफंड तेज हुए। केंद्र के इन सुधारों को उन राज्यों का समर्थन मिला, जहां मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर मजबूत है। इस दौरान पंजाब ने भी शासन सुधारों की पहल करते हुए 8 अक्तूबर, 2025 को ‘पंजाब राइट टू बिजनैस एक्ट 2025’ नोटिफाई किया, इसके अलावा क्लस्टर आधारित नई औद्योगिक नीति के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान व उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की पहल पंजाब के मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर की मजबूती का संकेत हैं, पर पंजाब की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनैस’  की यह पूरी कवायद तभी असरदार साबित होगी, जब पंजाब राइट टू बिजनैस एक्ट 2025 में आई.टी.सी. रिफंड को भी शामिल किया जाए। 
रिफंड में देरी के कारण हजारों एम.एस.एम.ई. की वर्किंग कैपिटल लंबे समय से सरकार के पास अटकी है। आई.टी.सी. रिफंड को पंजाब राइट टू बिजनैस एक्ट, 2025 में शामिल करने से पंजाब की उद्योग-हितैषी मंशा कागजी कार्रवाई से आगे टिकाऊ औद्योगिक विकास में तबदील होगी। 

नकदी प्रवाह का संकट : पंजाब का मैन्युफैक्चरिंग सैक्टर इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटो कंपोनैंट्स, टैक्सटाइल और गारमैंट्स, साइकिल, प्लास्टिक, रबड़, केबल और खेलों के सामान से जुड़े हजारों एम.एस.एम.ई. पर टिका है। ये छोटे कारोबारी स्टील, पॉलिमर, रबड़, प्लास्टिक और इलैक्ट्रिकल इनपुट जैसे कच्चे माल पर 18 प्रतिशत जी.एस.टी. देते हैं, जबकि इनके तैयार माल पर 5 प्रतिशत जी.एस.टी. लगता है। इस ‘इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर’ यानी कच्चे माल पर अधिक टैक्स व तैयार माल पर कम टैक्स के बीच का अंतर कारोबारियों को रिफंड या एडजस्ट करने का जी.एस.टी. कानून में स्पष्ट प्रावधान है।  आई.टी.सी. रिफंड में 6 महीने से लेकर 1 साल की देरी के कारण कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल फंसने से उन्हें महंगे ब्याज पर कर्ज उठाकर श्रमिकों की मजदूरी, बिजली के बिल, कच्चे माल की खरीद करनी पड़ती है या वे उत्पादन घटाने को मजबूर हैं। 

प्रतिस्पर्धा में पछाड़ती रिफंड में देरी : आई.टी.सी. रिफंड में देरी की दोहरी कीमत कारोबारियों को चुकानी पड़ रही है। पहली-नकदी संकट, जो एम.एस.एम.ई. को महंगे वर्किंग कैपिटल लोन की ओर धकेलता है। दूसरा-प्रतिस्पर्धा में गिरावट। देरी से मिलने वाले रिफंड के कारण उत्पादन पर लागत बढऩे से पंजाब के कारोबारी महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व  हरियाणा जैसे राज्यों के उद्योगों से पिछड़ रहे हैं, जहां आई.टी.सी. रिफंड प्रक्रिया तेज है। जी.एस.टी. दरें व स्लैब घटाए जाने के बाद रिफंड के दावे बढऩे से समस्या और गंभीर हो गई है। अगर इसे जल्द नहीं सुलझाया गया, तो जो मसला अभी सिर्फ रिफंड में देरी का है, एक बड़ी औद्योगिक मंदी का रूप ले सकता है। 

ईज ऑफ डूइंग बिजनैस नए निवेश तक सीमित क्यों : पंजाब राइट टू बिजनैस (संशोधन) एक्ट 2025, लगभग 19 औद्योगिक मंजूरियां 5 से 18 दिन में देने का दावा करता है। लेकिन कारोबार को आसान बनाना सिर्फ नए प्रोजैक्टस को मंज़ूरी तक सीमित नहीं है। मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के लिए कैश फ्लो  सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है, जितना नए निवेश को तेज मंजूरी। अगर कानूनी प्रावधान के बावजूद आई.टी.सी. रिफंड लंबे समय तक लटके रहें तो कारोबार में सरकार के सुधार एजैंडे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। समय पर आई.टी.सी. रिफंड कोई रियायत या सबसिडी नहीं, बल्कि यह कारोबारियों का कानूनी अधिकार है। गला काट प्रतिस्पर्धा के युग में उद्योगों के हालात ऐसे नहीं हैं कि वे सिस्टम की लापरवाही को लंबे समय तक अपने कंधों पर ढो सकें। 

आई.टी.सी. रिफंड हेतु रोडमैप : जब केंद्र सरकार रिफंड से संबंधित दस्तावेज के आधार पर रिस्क एसैसमैंट प्रोसैस 7 से 15 दिनों के भीतर निपटाकर बनते रिफंड का 90 प्रतिशत दे रही है, तो  पंजाब का जी.एस.टी. विभाग ऐसा क्यों नहीं कर सकता? इसका रोडमैप तीन मजबूत स्तंभों पर टिका है। पहला, कानूनी समय-सीमा व जवाबदेही। पंजाब को आई.टी.सी. रिफंड के लिए केंद्र सरकार की तर्ज पर 10-15 दिन की कानूनी समय-सीमा तय करनी चाहिए। तय अवधि में रिफंड पर कोई आपत्ति न होने पर इसे डीम्ड अप्रूवल माना जाए। रिफंड में 60 दिन से अधिक की देरी पर सी.जी.एस.टी. एक्ट की धारा 56 के तहत कारोबारियों को रिफंड राशि पर ब्याज मिले, ताकि जी.एस.टी. विभाग की प्रशासनिक जवाबदेही तय हो व उद्योगों को कैश फ्लो संकट से बचाया जा सके। 

दूसरा, डिजिटल-फस्र्ट व बगैर रुकावट प्रोसैस। जी.एस.टी. प्रोसैस पूरी तरह डिजिटल होने के बावजूद, विभाग द्वारा बार-बार स्पष्टीकरण मांगे जाने से रिफंड अटक जाते हैं। जी.एस.टी.एन. से जुड़े ए.आई.-आधारित ऑटो-वैलिडेशन टूल्स की मदद से पंजाब का जी.एस.टी. विभाग भी इनपुट-आऊटपुट टैक्स की जांच कर फर्जी आई.टी.सी. रिफंड रोक कर ईमानदार करदाताओं को बेवजह परेशानी से बचा सकता है। कारोबारियों की रिफंड संबंधी समस्या के तुरंत समाधान के लिए आई.टी.सी. रिफंड समॢपत सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएं। 
तीसरा, कैश फ्लो पर केंद्र व राज्य का तालमेल। चूंकि रिफंड जी.एस.टी. पूल से दिए जाते हैं, इसलिए पंजाब को केंद्र के साथ नकदी प्रबंधन पर तालमेल रखना चाहिए। वित्त विभाग, जी.एस.टी. अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक स्थायी संयुक्त कार्य समूह बनाया जा सकता है, जो लंबित मामलों पर नजर रखे, कैश फ्लो संतुलित करे, ताकि प्रोडक्शन पर असर पडऩे से पहले ही संकट रोका जा सके। 

आगे की राह : आई.टी.सी. रिफंड में अड़चन दूर करना कोई रियायत नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में एक जरूरी सुधार है। पंजाब राइट टू बिजनैस एक्ट-2025 में समयबद्ध आई.टी.सी. रिफंड को शामिल करने से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनैस’ सिर्फ एक नारा नहीं रह जाएगा, बल्कि सरकार के प्रति कारोबारियों का भरोसा मजबूत करेगा। (लेखक कैबिनेट मंत्री रैंक में पंजाब इकोनॉमिक पॉलिसी एवं प्लानिंग बोर्ड के वाइस चेयरमैन भी हैं)-डा. अमृत सागर मित्तल (वाइस चेयरमैन सोनालीका) 

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