प्याज : आंसू नहीं, अब मुस्कान की वजह

Edited By Updated: 16 Mar, 2023 06:43 AM

onion no tears now reason for smile

भारतीय व्यंजनों में व्यापक पैमाने पर उपयोग होने वाला प्याज देश के ज्यादातर घरों में खाया जाता है।

भारतीय व्यंजनों में व्यापक पैमाने पर उपयोग होने वाला प्याज देश के ज्यादातर घरों में खाया जाता है। चीन के बाद हम दुनिया में प्याज के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश हैं। पिछले साल 31.6 मिलियन मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ था, जिसके 2022-23 में बढ़ कर 31.8 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचने की संभावना है। भारत में प्याज का उत्पादन मुख्य रूप से महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में होता है। देश के कुल उत्पादन का दो तिहाई प्याज इन्हीं राज्यों में पैदा होता है और अगर किसी तरह का संकट पैदा हुआ तो राष्ट्रीय आपूर्ति पर इसका काफी असर पड़ता है।

मई और जून की चिलचिलाती गर्मी को छोड़ कर, प्याज की खेती यहां पूरे साल की जाती है। प्याज का उत्पादन खरीफ, पछेती खरीफ और रबी के मौसम में होता है। प्याज के कुल उत्पादन का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा रबी के मौसम में होता है। रबी के मौसम में पैदा होने वाले प्याज (जिसकी खेती मार्च से लेकर मई महीने के बीच की जाती है) का भंडारण जहां 5 से 7 महीने की अवधि के लिए किया जा सकता है, वहीं खरीफ के मौसम में पैदा होने वाले प्याज बहुत ही जल्द खराब हो जाते हैं और वे आमतौर पर 30 दिनों से ज्यादा समय तक नहीं टिक पाते हैं।

प्याज के जल्द खराब होने की प्रकृति के साथ-साथ प्रसंस्करण के मामले में अपेक्षाकृत कम सुविधा और भंडारण के कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण फसल की कटाई के बाद उपज का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है। सम्मिलित रूप से इन कारकों के कारण अक्सर थोड़े-थोड़े अंतराल पर उपज की अधिकता और कमी की घटनाओं में वृद्धि होती रहती है, जिससे इसकी उपलब्धता और खरीद संबंधी सामथ्र्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जोकि किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए नुकसानदायक साबित होता है।

प्याज की कीमतें जुलाई महीने से धीरे-धीरे बढऩा शुरू होती हैं और अक्तूबर के महीने में वह सबसे ज्यादा होती हैं। प्याज की खरीफ और पछेती खरीफ फसलों की आवक के साथ, उसकी कीमतें नवंबर से लेकर फरवरी के मध्य आते-आते कम हो जाती हैं। फरवरी के दूसरे पखवाड़े में पछेती खरीफ और रबी की फसल की आवक के बीच पडऩे वाले छोटे से अंतराल के कारण फरवरी महीने में प्याज की कीमतों में वृद्धि होती है जो मार्च में आवक बढऩे के साथ कम हो जाती है।

हालांकि, इस साल यह स्थिति किसानों के लिए पूरी तरह से उलट गई। हाल ही में थोक बाजारों में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आई है। प्याज के प्रमुख उत्पादक एवं व्यापारिक केन्द्र, महाराष्ट्र में पिछले पांच महीनों के दौरान कीमतों में 25 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई। यहां थोक औसत मूल्य नवंबर 2022 में 2,150 रुपए प्रति किं्वटल से गिरकर फरवरी 2023 में लगभग 1,600 रुपए प्रति किं्वटल रह गया।

मौसम की अनिश्चितता के कारण इस वर्ष लंबे समय तक बारिश हुई। इसके परिणामस्वरूप प्याज के किसानों को मजबूरन देर से बुवाई करनी पड़ी। यहां तक कि कुछ मामलों में तो फिर से बुवाई करनी पड़ी। इस तरह खरीफ उत्पादन का कुछ हिस्सा पछेती खरीफ के उत्पादन में बदल गया। दूसरी ओर, फरवरी के अपेक्षाकृत गर्म रहने के कारण रबी की फसल जल्दी कट जाने से पछेती खरीफ और रबी की फसल की आवक एक-साथ आ गई।

बाजार में आवक बढऩे और भंडारण की बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण प्याज के प्रमुख उत्पादक राज्यों में इसकी थोक कीमतों में जहां खासी गिरावट आई, वहीं इसके उपभोक्ता राज्यों में कीमतें अपेक्षाकृत अधिक रहीं। सरकार ने नैफेड और एन.सी.सी.एफ. को हस्तक्षेप करने और महाराष्ट्र एवं गुजरात के किसानों से प्याज की खरीद करने का दायित्व सौंपा। इस कदम से किसानों को काफी राहत मिली (दोनों एजैंसियों ने पिछले 10 दिनों के दौरान किसानों से कुल लगभग 7,000 एम.टी. प्याज की खरीद की है)।

हालांकि, इस स्थिति ने एक बार फिर से भारत में प्याज की एक मजबूत मूल्य-शृंखला विकसित करने की जरूरत को रेखांकित किया। सरकार किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनाती है। किसानों एवं उपभोक्ताओं के हित अक्सर प्रतिस्पर्धी होते हैं। वह एक प्रभावी आपूर्ति शृंखला को बढ़ावा देने, भंडारण के रचनात्मक उपायों और मूल्य वॢधत उत्पाद के विकास सहित कई मोर्चों पर प्याज की कीमतों से जुड़ी स्थिति को संभाल रहे हैं। नैफेड और एन.सी.सी.एफ. को पिछले साल मूल्य स्थिरीकरण कोष (पी.एस.एफ.) के जरिए 2.5 लाख एम.टी. के प्याज का बफर स्टॉक विकसित करने के लिए अधिकृत किया गया था।

जरूरत पडऩे पर इस स्टॉक को खुले बाजार में जारी किया जाना था। इसके सकारात्मक नतीजे निकले हैं, जिसके परिणामस्वरूप 2022 के दौरान देश भर में उपभोक्ताओं के लिए प्याज की कीमतें स्थिर बनी रहीं। वर्ष 2023 में बफर स्टॉक बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिससे साल के अंत तक उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्याज साल भर सभी भारतीयों के लिए सस्ते में उपलब्ध हो। इस तरह से कभी-कभार आंसू लाने वाला प्याज हमेशा मुस्कुराहट लाने वाला बन सकेगा। -रोहित कुमार सिंह

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