Edited By ,Updated: 27 Jun, 2026 03:52 AM

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ मुलाकात ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की अटकलों को तेज कर दिया है। जहां भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी उत्तर प्रदेश इकाई में...
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ मुलाकात ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की अटकलों को तेज कर दिया है। जहां भाजपा ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी उत्तर प्रदेश इकाई में संगठनात्मक बदलाव की घोषणा की है, वहीं नए पदाधिकारियों की सूची को व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक संतुलन सुनिश्चित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। जून 2024 में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद से कोई विस्तार या फेरबदल नहीं हुआ है। इस संगठनात्मक फेरबदल पर बारीकी से नजर रखी जाएगी क्योंकि भाजपा 2027 के विधानसभा, राष्ट्रपति चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनावों सहित आगामी चुनावों की शृंखला के लिए तैयारी कर रही है। इस बात की संभावना है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल और भाजपा की राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब जैसे आगामी चुनाव वाले राज्यों के नेता शामिल किए जा सकते हैं।
केंद्रीय परिषद में अन्य जिन्हें बदला जा सकता है, उनमें सड़क परिवहन राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी शामिल हैं। हालांकि वर्तमान रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू को परिषद से नहीं हटाया गया है, जबकि उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी बिट्टू को अपना कत्र्तव्य जारी रखने के लिए कहेंगे, जिनकी नजर अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों पर है। बिट्टू पंजाब के एक लोकप्रिय जाट सिख नेता हैं।
यू.पी. में ब्राह्मणों पर दाव : 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के वोट हासिल करने के लिए, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय के हित केवल बसपा के साथ ही सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत का पालन करते हुए अपनी सरकार के दौरान सभी वर्गों के लिए सम्मान और भागीदारी सुनिश्चित की है।
‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बसपा द्वारा उच्च जाति समुदायों, विशेषकर ब्राह्मणों के साथ जुडऩे और उन्हें चुनावों में प्रतिनिधित्व देने के कदम ने विपक्षी दलों के बीच ‘बेचैनी’ पैदा कर दी है। बसपा दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपने पारंपरिक समर्थन आधार को मजबूत करने के साथ-साथ ब्राह्मणों तक अपनी पहुंच का विस्तार कर रही है। दूसरी ओर, सपा ने अपने मुख्य यादव-मुस्लिम आधार को प्रभावित किए बिना उच्च जाति के मतदाताओं तक अपनी पहुंच लगातार बढ़ाई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने समाजवादी ब्राह्मण सभा की एक बैठक आयोजित की और घोषणा की कि वह अगले साल के विधानसभा चुनावों के दौरान मजबूत ब्राह्मण चेहरों को बढ़ावा देंगे। उनसे बड़ी संख्या में ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की उम्मीद है।
बंगाल में यू.सी.सी. लागू करने की तैयारी : बंगाल की पहली भाजपा सरकार राज्य में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता (यू.सी.सी.) लागू करने के लिए एक विधेयक लाने की रणनीतिक योजना बना रही है। विधानसभा में आयोजित बिजनैस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस मामले पर चर्चा हुई और इसे अंतिम रूप दिया गया। इस बदलाव से राज्य में एक बड़ा कानूनी और सामाजिक नीतिगत बदलाव लाने की उम्मीद है, जिसमें भाजपा यू.सी.सी. को अपने प्रमुख शासन सुधारों में से एक के रूप में पेश कर रही है। भाजपा नेताओं के अनुसार, समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन पार्टी के संकल्प पत्र की प्रमुख प्रतिबद्धताओं में से एक था। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद बंगाल यू.सी.सी. लागू करने वाला चौथा राज्य बन जाएगा।
कांग्रेस के धरने-प्रदर्शन : कांग्रेस ने नीट पेपर लीक के मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने हेतु 40 दिवसीय आऊटरीच गतिविधियों, सार्वजनिक चर्चाओं और विरोध प्रदर्शनों के कार्यक्रम की घोषणा की है। हालांकि मई में नीट रद्द होने के बाद से छात्र समूह लगातार सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन किसी भी सरकारी अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।
‘छात्रों की गूंज’ अभियान की घोषणा करते हुए, असम कांग्रेस प्रमुख गौरव गोगोई ने कहा कि पेपर लीक और व्यवधान की बार-बार होने वाली घटनाओं ने छात्रों के बीच यह धारणा पैदा कर दी है कि समस्या प्रणालीगत है, न कि कुछ व्यक्तियों की गलती। उन्होंने कहा, ‘‘भारत के छात्रों का भरोसा टूट चुका है। इतने सारे टूटे सपनों की जिम्मेदारी कौन लेगा?’’ उन्होंने बताया कि यह अभियान कोचिंग सैंटरों, विश्वविद्यालयों, छात्रावासों, पुस्तकालयों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर चलाया जाएगा ताकि छात्रों से जुड़ सकें और परीक्षा से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।-राहिल नोरा चोपड़ा