‘गांधी परिवार की तुलना में संघ परिवार कहीं अधिक लोकतांत्रिक’

Edited By Updated: 06 Aug, 2026 04:21 AM

the sangh parivar is far more democratic than the gandhi family

राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव तृणमूल कांग्रेस (टी.एम.सी.) से इस्तीफा देने के कुछ ही हफ्तों बाद हाल ही में भाजपा में शामिल हुई हैं। टी.एम.सी. में उनका कार्यकाल 5 साल तक रहा, जो उससे पहले कांग्रेस के साथ उनके दशकों लंबे जुड़ाव से काफी छोटा था। सुष्मिता...

राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव तृणमूल कांग्रेस (टी.एम.सी.) से इस्तीफा देने के कुछ ही हफ्तों बाद हाल ही में भाजपा में शामिल हुई हैं। टी.एम.सी. में उनका कार्यकाल 5 साल तक रहा, जो उससे पहले कांग्रेस के साथ उनके दशकों लंबे जुड़ाव से काफी छोटा था। सुष्मिता ने अपने पूर्व दलों से मोहभंग के कारणों, नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन से सरकार के निपटने के तरीके और आर.एस.एस. के बारे में बात की। तीन राजनीतिक दलों में रहीं सुष्मिता ने बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एन.एस.यू.आई., जो कि कांग्रेस की छात्र इकाई है, से छात्र राजनीति के रूप में की थी और 2021 में इसे छोड़ दिया। तो, कांग्रेस से तृणमूल में जाना कोई वैचारिक बदलाव नहीं था..., ममता दीदी ने खुद कांग्रेस छोड़कर इस पार्टी का गठन किया था।

उन्हें बहुत जल्दी यह अहसास हुआ कि बंगाल या देश में कहीं भी टी.एम.सी. का वोट-शेयर वैचारिक नहीं है, यह नेता-केंद्रित है। इसके विपरीत, कांग्रेस का एक वैचारिक आधार है, अगर आप भाजपा को पसंद नहीं करते हैं, तो आप कांग्रेस को वोट देते हैं। लेकिन भाजपा का वोट पूरी तरह से वैचारिक है। जब उनके पास दो सांसद थे या जब उनके पास एक भी सांसद नहीं था और आज जब वे सत्ता पक्ष में हैं, उन्होंने अपनी विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया। पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बारे में उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर चुनाव के बाद कई समीक्षा बैठकें करती है। इसलिए, यह लोकतांत्रिक प्रतीत होती है लेकिन जब कार्यान्वयन की बात आती है, तो आंतरिक सहमति की कमी होती है। और तृणमूल में, चर्चा के लिए शायद ही कोई मंच हो। सत्ता एक ही व्यक्ति के हाथों में केंद्रित है, क्योंकि उन्होंने पार्टी बनाई और इसे चलाया।

आलोचक कहेंगे कि भाजपा में आपकी कोई आवाज नहीं है। वहां केवल दो लोग हैं, पी.एम. मोदी और गृह मंत्री (अमित शाह)। उन्हें नहीं लगता कि यह सच है क्योंकि सभी सांसदों का एक संरक्षक मंत्री होता है। आप अपने राज्य में जो कुछ भी सामना कर रहे हैं, उसके बारे में उनसे बात कर सकते हैं। इसके अलावा, आपके पास संगठन है..., यदि कुछ भी काम नहीं करता, चाहे आप इसे पसंद करें या न करें, संघ परिवार की नजरें और कान जमीन (जमीनी हकीकत) पर हैं। वह संघ परिवार से किसी व्यक्ति से नहीं मिलीं लेकिन उनके लिए बहुत स्पष्ट है कि संघ के बहुत वरिष्ठ, अनुभवी नेता संसदीय प्रणाली का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए बातचीत के बहुत सारे स्तर हैं। कांग्रेस में, यदि शीर्ष पर कोई आपसे नाराज हो जाता है, तो आपका करियर समाप्त हो जाता है। आप कांग्रेस में परिवार का मुकाबला नहीं कर सकते और जीवित (राजनीतिक रूप से) नहीं रह सकते। लेकिन अगर आप भाजपा में एक योग्य व्यक्ति हैं, तो आपके लिए हमेशा एक मंच रहेगा।

भाजपा में संघ परिवार की भूमिका के बारे में सुष्मिता का कहना है, कांग्रेस पर भी एक परिवार का राज है। एक पार्टी गांधी परिवार के साथ है और भाजपा के लिए, उनका विचार संघ परिवार है। और एक बड़े संगठन जैसे आर.एस.एस. का होना बेहतर है, जहां अलग-अलग विचार हों, न कि केवल एक परिवार। परिवार तो दोनों तरफ है। उस तरफ एक ‘पहला परिवार’ है और इस तरफ, एक संघ परिवार है। लेकिन संघ परिवार कहीं अधिक लोकतांत्रिक है क्योंकि यह एक परिवार की तुलना में एक बड़ा संस्थान है। टी.एम.सी. छोडऩे बारे दास ने कहा कि तृणमूल में उनकी स्थिति किसी और जैसी नहीं थी क्योंकि वह बंगाल में जमीनी स्तर पर राजनीति करने वाली व्यक्ति नहीं थी। उन्हें लगा कि टी.एम.सी. नेता के लिए बंगाल के बाहर अपनी पार्टी का विस्तार करना बेहद कठिन था। उनके पास कांग्रेस और भाजपा के बीच एक विकल्प था। उन्हें लगा कि जिस तरह से वे (भाजपा) पूर्वोत्तर राज्यों में काम कर रहे हैं, उनकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। असम के सी.एम. (हिमंत बिस्वा सरमा) और गृह मंत्री अमित शाह से बात करने के बाद, उन्हें स्पष्ट हो गया था कि यदि वह अपने लोगों के लिए अगले 10-15 वर्षों तक काम करना चाहती हैं, तो भाजपा ही वह पार्टी है।

छात्रों के विरोध प्रदर्शन से सरकार के निपटने के तरीके के बारे में सुष्मिता का कहना था कि मोदी सरकार ने जिस तरह से प्रतिक्रिया दी, चाहे नया कानून लाकर हो, धर्मेंद्र प्रधान के  कदम उठाने (सक्रिय होने) से हो, उन्होंने इसे अच्छी तरह से संभाला। अब जो मामला अदालत के विचाराधीन है, वह यह है कि वहां इस्तेमाल किया गया बल अनुपातिक और आवश्यक था या यह अनुचित (अत्यधिक) था। हालांकि, संसद की ओर मार्च करते हजारों लोगों को देखते हुए, क्या वे गेट पर रुक जाते? संसद की सुरक्षा करना भी गृह मंत्री की जिम्मेदारी है।-दिव्या ए. 

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