Edited By ,Updated: 23 Jan, 2026 05:20 AM

शिरोमणि अकाली दल, जिसे अकाली दल बादल के नाम से जाना जाता है, जिसने पिछले 2 दशकों में 3 बार सरकार बनाई है, पिछले एक दशक से बहुत मुश्किल समय का सामना कर रहा है। इस मुश्किल समय का कारण न केवल सरकार चलाते समय की गई गलतियां हैं, बल्कि कई नए अकाली दलों का...
शिरोमणि अकाली दल, जिसे अकाली दल बादल के नाम से जाना जाता है, जिसने पिछले 2 दशकों में 3 बार सरकार बनाई है, पिछले एक दशक से बहुत मुश्किल समय का सामना कर रहा है। इस मुश्किल समय का कारण न केवल सरकार चलाते समय की गई गलतियां हैं, बल्कि कई नए अकाली दलों का उभरना भी है। इनमें शिरोमणि अकाली दल डैमोक्रेटिक, शिरोमणि अकाली दल टकसाली, शिरोमणि अकाली दल संयुक्त, अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ और शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत शामिल हैं। हालांकि अब अकाली दल डैमोक्रेटिक, अकाली दल टकसाली और अकाली दल संयुक्त का वजूद नहीं है लेकिन अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ और शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत शिरोमणि अकाली दल बादल के लिए बड़ा सिरदर्द बन गए हैं।
अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ के 2 बड़े नेता भाई अमृतपाल सिंह और भाई सरबजीत सिंह पार्टी बनाने से पहले ही लोकसभा चुनाव जीत चुके थे। बाद में, उनके समर्थकों ने भाई अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह और भाई सरबजीत सिंह के साथ मिलकर अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ नाम की पार्टी बनाई और जेल में बंद भाई अमृतपाल सिंह को पार्टी का अध्यक्ष घोषित किया। फिर पार्टी का संगठनात्मक ढांचा बनाना शुरू किया। सबसे पहले, पार्टी की सबसे ताकतवर कमेटी, ‘पंच प्रधानी पंज मैंबरी कमेटी’ बनाई गई। इसके बाद, 13 मैंबर वाली वर्किंग कमेटी और 13 प्रवक्ता नियुक्त किए गए। जिला लैवल पर कार्रवाई चलाने के लिए सभी जिलों से ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए और निचले स्तर पर एक ढांचा तैयार किया जा रहा है।
हालांकि शिरोमणि अकाली दल पुनर सुरजीत ने शुरू में ढांचा बनाने में लापरवाही दिखाई, लेकिन बाद में बड़े स्तर पर पद बांटे गए। पार्टी अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कोर कमेटी, पार्टी के सीनियर वाइस प्रैसिडैंट, वाइस प्रैसिडैंट, महासचिव, संगठनात्मक सचिव, ऑफिस सैक्रेटरी और कई दूसरे पदाधिकारियों की घोषणा की। पार्टी अध्यक्ष ने पार्टी के चीफ स्पोक्सपर्सन और स्पोक्सपर्सन भी नियुक्त किए। राजनीतिक मामलों पर सोच-विचार करने और फैसले लेने के लिए एक राजनीतिक मामलों की समिति (पी.ए.सी.) भी बनाई गई। इतना बड़ा ढांचा बनाने के बावजूद, अकाली दल पुनर सुरजीत लोगों की उम्मीदों के मुताबिक राजनीतिक कदम उठाने में कामयाब नहीं हो सका। यहां तक कि पार्टी खुद की बनाई गाइडलाइंस पर भी कायम नहीं रह सकी कि एक परिवार को एक पद मिलना चाहिए, जिससे पार्टी के आगे के कामकाज पर सवालिया निशान लगने लगे।
यहां तक कि इसी वजह से पार्टी की भर्ती के शुरुआती दौर में मेहनती वर्कर और नेता भी साफ तौर पर परेशान थे कि मेहनती लोग पीछे छूट गए। उनमें से कई को एक भी पद नहीं मिला और नए तथा बड़े नेताओं के परिवार वालों को कई पद दे दिए गए। इसी दुविधा के चलते अकाली दल पुनर सुरजीत ने ढांचा खत्म करने का फैसला किया है, हालांकि कोई भी बड़ा नेता खुलकर इस फैसले को सपोर्ट नहीं करता, लेकिन यह जरूर कहा जा रहा है कि पार्टी का नाम चुनाव आयोग में रजिस्टर कराने के लिए कई फैसले लिए गए हैं। अकाली दल पुनर सुरजीत ने इलैक्शन कमीशन ऑफ इंडिया में पार्टी की रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है। जानकारी के मुताबिक, पार्टी ने 3 नाम लिखे हैं, जिनमें शिरोमणि अकाली दल पंजाब, शिरोमणि अकाली दल सर्ब हिंद और अकाली दल शामिल हैं। इस तरह, अगर चुनाव आयोग इनमें से किसी भी नाम को मान्यता देता है, तो अकाली दल पुनर सुरजीत का स्थान एक नया अकाली दल ले लेगा।
अब जब विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक साल बचा है, तो अकाली दल पुनर सुरजीत और वारिस पंजाब दे ने पिछले ब्लॉक समिति और जिला परिषद के चुनाव न लड़कर शिरोमणि अकाली दल बादल को जरूर नुकसान पहुंचाया लेकिन दोनों पाॢटयों के नेताओं को पता चल गया है कि चुनाव न लडऩे की वजह से दोनों पाॢटयों की हालत शिरोमणि अकाल दल बादल से कमजोर दिखने लगी है, इसलिए दोनों पार्टियों के नेता खुद को विरोधी अकाली दल से ज्यादा मजबूत साबित करने का तरीका ढूंढ रहे हैं। इसी वजह से माघी के मौके पर कॉन्फ्रैंस न करने के बावजूद, अकाली दल पुनर सुरजीत के दो बड़े नेताओं ने अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ के मंच से संबोधित होकर लोगों तक अपनी पार्टी का मैसेज पहुंचाने की कोशिश की और शिरोमणि अकाली दल बादल को यह भी बताने की कोशिश की कि शिरोमणि अकाली दल बादल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के अध्यक्ष का पद छोड़े बिना एकता मुमकिन नहीं है। लेकिन सुखबीर सिंह बादल ने इस बात का ध्यान रखते हुए अकाली दल पुनर सुरजीत और दूसरे अकाली नेताओं से शिरोमणि अकाली दल बादल में शामिल होने की अपील दोहराई। अब जब अकाली दल बादल और अकाली दल पुनर सुरजीत के नेता अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं, तो अकाली दल पुनर सुरजीत और अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ के लिए सही रास्ता मेल-मिलाप का है।
इस मकसद के लिए दोनों पाॢटयों के नेताओं की हुई मीटिंग्स में काफी हद तक आम सहमति बन गई है। जल्द ही दोनों पाॢटयों की लीडरशिप कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाने के लिए एक संयुक्त कमेटी बनाने का फैसला कर सकती है। इसी मकसद से आज चंडीगढ़ में अकाली दल पुनर सुरजीत के सीनियर नेताओं की मीटिंग में 3 मैंबरी राजसी तालमेल कमेटी का गठन किया गया है, जो अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ के नेताओं से आगे की बातचीत करेंगे। अगर बातचीत तय लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ी तो अगले महीने दोनों अकाली पाॢटयों के बीच गठबंधन की प्रबल संभावना है और यह गठबंधन चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति में दोनों अकाली पाॢटयों के बीच पहला राजनीतिक गठबंधन होगा।-इकबाल सिंह चन्नी