LPG Crisis: खुशखबरी! अब देश में दूर होगा गैस संकट! Strait of Hormuz से सामने आई बड़ी खबर

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 12:55 PM

india s major victory 45 000 tonnes of gas and 80 000 tonnes of oil arrive safe

Middle East में जारी भीषण तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सामरिक जीत सामने आई है। युद्ध के मुहाने पर खड़े Strait of Hormuz में फंसे भारतीय जहाजों ने सुरक्षित वापसी शुरू कर दी है।

LPG Crisis: Middle East में जारी भीषण तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सामरिक जीत सामने आई है। युद्ध के मुहाने पर खड़े Strait of Hormuz में फंसे भारतीय जहाजों ने सुरक्षित वापसी शुरू कर दी है।

 45,000 टन LPG लेकर पहुंचा जहाज

भारतीय ध्वज वाला विशालकाय एलपीजी टैंकर 'शिवालिक' कुछ ही घंटों में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर लंगर डालने वाला है। इस जहाज में 45,000 मीट्रिक टन से ज्यादा LPG लदी हुई है। यह वही टैंकर है जो युद्ध प्रभावित क्षेत्र में फंसा हुआ था। इसके आने से देश के महानगरों में चल रही गैस की किल्लत काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा दूसरा टैंकर 'नंदा देवी' भी कल यानि की 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर पहुंच जाएगा।

कच्चे तेल की सप्लाई भी सुरक्षित पहुंचेगी भारत

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक और अच्छी खबर है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह से लगभग 80,800 टन कच्चा तेल लेकर भारतीय टैंकर 'जग लाडकी' सुरक्षित भारत के लिए निकल चुका है। वहीं, एक अन्य जहाज 'जग प्रकाश' ओमान से पेट्रोल लेकर अफ्रीका की ओर बढ़ रहा है।

भारत ने हासिल की कूटनीतिक जीत

भारत सरकार के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों और दबाव के बाद ही इन जहाजों को संकटग्रस्त क्षेत्र से निकलने का रास्ता मिला। वर्तमान में फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में 22 भारतीय जहाज और 611 नाविक मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा पर भारतीय एजेंसियां और मंत्रालय 24 घंटे नजर रख रहे हैं।

देश के लिए क्यों जरुरी है यह रास्ता?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है:

  • 88% कच्चा तेल आयात किया जाता है।
  • 60% LPG विदेशों से आती है।
  • 85-90% LPG का आयात अकेले सऊदी अरब और UAE जैसे देशों से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रास्ते होता है।

ईरान पर हालिया हमलों के बाद इस रास्ते के बंद होने से भारत में होटलों, रेस्तरां और औद्योगिक इकाइयों को गैस की सप्लाई सीमित कर दी गई थी, जिससे कीमतों में उछाल आया था। इन टैंकरों के आने से अब बाजार में स्थिरता लौटने के आसार हैं।

 

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