Edited By Pardeep,Updated: 25 Sep, 2026 10:48 PM

कमाई और निवेश करने के बावजूद ज्यादातर भारतीय परिवार अचानक आने वाले वित्तीय संकटों और आपातकालीन खर्चों से निपटने के लिए तैयार नहीं हैं। फिनोवेट फाइनेंशियल सर्विसेज (Finnovate Financial Services) की एक नई सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, देश के 46 प्रतिशत...
नई दिल्ली: कमाई और निवेश करने के बावजूद ज्यादातर भारतीय परिवार अचानक आने वाले वित्तीय संकटों और आपातकालीन खर्चों से निपटने के लिए तैयार नहीं हैं। फिनोवेट फाइनेंशियल सर्विसेज (Finnovate Financial Services) की एक नई सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, देश के 46 प्रतिशत लोगों के पास तीन महीने का खर्च चलाने के लिए भी इमरजेंसी फंड उपलब्ध नहीं है या उनके पास कोई इमरजेंसी फंड ही नहीं है। वहीं, 60 प्रतिशत परिवारों का हेल्थ इंश्योरेंस कवर 25 लाख रुपये से कम है। इस रिपोर्ट में भारतीय परिवारों की बचत, कर्ज, टैक्स प्लानिंग, निवेश और परिवार की सुरक्षा जैसे अहम वित्तीय पहलुओं का विश्लेषण किया गया है।
नौकरी छूटने या मेडिकल इमरजेंसी में बजट पर बढ़ेगा दबाव
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इमरजेंसी फंड नौकरी जाने, अचानक मेडिकल खर्च आने या परिवार की जरूरी आवश्यकताओं के समय काम आता है। 46 फीसदी लोगों के पास तीन महीने के खर्च के बराबर बचत न होने के कारण कमाई रुकने या अचानक बड़ा खर्च आने पर घरेलू बजट बिगड़ने का गंभीर खतरा बना रहता है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी परिवार के लिए इमरजेंसी फंड की सही सीमा उनकी मासिक आय, ईएमआई (EMI) की देनदारियों, नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर निर्भर करती है।
14% लोग पूरी तरह बीमा से वंचित, 14% सिर्फ कंपनी के कवर पर निर्भर
स्वास्थ्य बीमा के मोर्चे पर भी रिपोर्ट में बड़ा गैप सामने आया है। सर्वे के अनुसार 43 प्रतिशत लोगों के पास कंपनी की ओर से मिला कवर और खुद की ली गई व्यक्तिगत हेल्थ पॉलिसी दोनों उपलब्ध हैं। 14 प्रतिशत लोग पूरी तरह अपनी कंपनी द्वारा दिए गए हेल्थ कवर पर ही निर्भर हैं। इसके अलावा 14 प्रतिशत लोगों के पास किसी भी प्रकार का हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है। कंपनी की ओर से मिलने वाली हेल्थ पॉलिसी केवल नौकरी रहने तक ही प्रभावी होती है और नौकरी बदलने या रिटायरमेंट के बाद यह जारी नहीं रहती, इसलिए अलग से व्यक्तिगत पॉलिसी रखना बेहद जरूरी माना गया है।
14% तक बढ़ रही मेडिकल महंगाई, 57% आबादी पर EMI का बोझ
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सामान्य महंगाई दर 6 से 7 प्रतिशत के आसपास है, जबकि चिकित्सा क्षेत्र की महंगाई (Medical Inflation) 11 से 14 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अस्पताल का बढ़ता खर्च देखते हुए आज जो हेल्थ कवर पर्याप्त लग रहा है, वही कवर आने वाले वर्षों में कम पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, कर्ज के आंकड़ों पर नजर डालें तो 57 प्रतिशत लोगों पर किसी न किसी प्रकार की ईएमआई का बोझ चल रहा है। इनमें से 21 प्रतिशत लोग अपनी कुल आय का 20 से 40 प्रतिशत हिस्सा ईएमआई में चुकाते हैं, जबकि 9 प्रतिशत लोगों की आय का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ईएमआई भरने में चला जाता है।