Edited By jyoti choudhary,Updated: 14 Sep, 2026 12:02 PM

भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा बड़ा उपभोक्ता है। हालांकि भारत में सोने का उत्पादन बेहद कम है और हम अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी सोना आयात करते हैं। ऐसे में भारतीय कंपनियों का विदेशों में गोल्ड और क्रिटिकल मिनरल्स की
नई दिल्लीः भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा बड़ा उपभोक्ता है। हालांकि भारत में सोने का उत्पादन बेहद कम है और हम अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी सोना आयात करते हैं। ऐसे में भारतीय कंपनियों का विदेशों में गोल्ड और क्रिटिकल मिनरल्स की माइनिंग में कदम बढ़ाना रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
बेंगलुरु की कंपनी डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड ने मध्य एशियाई देश किर्गिस्तान में अपने गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट को एक्सप्लोरेशन और डेवलपमेंट से प्रोडक्शन के चरण तक पहुंचा दिया है। कंपनी के अनुसार, यह पहली भारतीय कंपनी है जिसने किर्गिस्तान में अपने गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट को प्रोडक्शन के चरण तक पहुंचाया है।
नारिन क्षेत्र में स्थित है अल्टिन टोर प्रोजेक्ट
अल्टिन टोर किर्गिस्तान के नारिन क्षेत्र में स्थित है। यह मिनरल से समृद्ध सोल्टन सारी जोन का हिस्सा है, जो करीब 300 किलोमीटर तक फैला हुआ है। यह क्षेत्र टिएन शान शियर जोन का भी हिस्सा है, जिसे सोने के भंडार के लिए जाना जाता है। मध्य एशिया में किर्गिस्तान के अलावा कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान भी प्रमुख गोल्ड उत्पादक देश हैं और दुनिया के शीर्ष 10 सोना उत्पादक देशों में शामिल हैं। किर्गिस्तान में भी सोने के महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं।
राष्ट्रपति ने किया गोल्ड प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन
एक रिपोर्ट के मुताबिक किर्गिज रिपब्लिक के राष्ट्रपति सादिर एन. जापारोव ने हाल में एक ऑनलाइन समारोह के जरिए अल्टिन टोर गोल्ड प्रोजेक्ट में गोल्ड प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन किया। इस प्रोजेक्ट का संचालन डेक्कन गोल्ड की स्थानीय सहायक कंपनी एवेलम पार्टनर एलएलसी कर रही है।
कंपनी ने बताया कि उसने अगस्त में इस प्रोजेक्ट से अपना पहला Gold Dore यानी कच्चा सोना तैयार किया था। अब कंपनी बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
डेक्कन गोल्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर हनुमा प्रसाद मोडाली ने कहा कि अल्टिन टोर प्रोजेक्ट कंपनी और भारतीय माइनिंग इंडस्ट्री के लिए एक अहम मोड़ है। उनके मुताबिक, विदेश में किसी प्रोजेक्ट को एक्सप्लोरेशन से प्रोडक्शन तक ले जाना यह दिखाता है कि भारतीय माइनिंग कंपनियां जिम्मेदारी के साथ संसाधनों का विकास कर सकती हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं।