Crude Oil Prices Hike: अमेरिका-ईरान तनाव से उछला कच्चा तेल, 6 महीने के हाई पर पहुंची कीमतें

Edited By Updated: 20 Feb, 2026 11:29 AM

crude oil prices surge on us iran tensions reaching a 6 month high

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार दूसरे दिन मजबूती के साथ छह महीने के उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे तेल बाजार में तेजी देखने को मिल रही है।

बिजनेस डेस्कः ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार दूसरे दिन मजबूती के साथ छह महीने के उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे तेल बाजार में तेजी देखने को मिल रही है।

20 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल पर बना हुआ है। पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट 1.9% की बढ़त के साथ 71.66 डॉलर पर बंद हुआ था और WTI भी 1.9% चढ़कर 66.43 डॉलर पर पहुंच गया था। पिछले दो सत्रों में कुल मिलाकर 6-7% की तेजी दर्ज की गई है, जो जनवरी के अंत के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई न्यूक्लियर डील के लिए 10 से 15 दिन की समय-सीमा दी है और चेतावनी दी है कि असफलता की स्थिति में “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं। इस बयान के बाद बाजार में सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य तैनाती 2003 के इराक युद्ध के बाद सबसे बड़ी बताई जा रही है। सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान भी अपनी रणनीतिक जगहों को मजबूत कर रहा है। इससे तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।

विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट पर निवेशकों की नजर है, क्योंकि दुनिया के लगभग एक-तिहाई तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता है। यदि यहां किसी प्रकार का व्यवधान आता है, तो कीमतों में और तेज उछाल संभव है।

सप्लाई और डिमांड फैक्टर भी मजबूत

अमेरिका में पिछले सप्ताह कच्चे तेल का भंडार लगभग 9 मिलियन बैरल घटा है, जो सितंबर के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। रिफाइंड प्रोडक्ट्स के स्टॉक में भी कमी आई है, जो मजबूत मांग का संकेत देता है।

इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर स्ट्राइक प्राइस तक के कॉल ऑप्शंस में बढ़ती खरीदारी यह दिखाती है कि निवेशक संभावित बड़े उछाल के खिलाफ हेजिंग कर रहे हैं।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का विषय है। यदि कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है।

अगर अमेरिका-ईरान वार्ता सफल रहती है तो कीमतों में नरमी आ सकती है लेकिन तनाव बढ़ने या सैन्य कार्रवाई की स्थिति में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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