चीन में भारतीय कंपनियों के लिए बढ़ी मुश्किलें, बिजनेस वीजा रिजेक्शन 95% तक पहुंचा

Edited By Updated: 21 Aug, 2026 04:24 PM

challenges mount for indian companies in china

चीन में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। भारतीय अधिकारियों, इंजीनियरों और तकनीकी टीमों के चीन के बिजनेस वीजा (M Visa) आवेदन बड़ी संख्या में खारिज किए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियों में वीजा मंजूरी...

नई दिल्लीः चीन में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। भारतीय अधिकारियों, इंजीनियरों और तकनीकी टीमों के चीन के बिजनेस वीजा आवेदन बड़ी संख्या में खारिज किए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियों में वीजा मंजूरी दर महज 5% तक रह गई है, जबकि कुछ मामलों में रिजेक्शन रेट 95% तक पहुंच गया है।

पहले चीन का बिजनेस वीजा हासिल करना भारतीय कंपनियों के अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए अपेक्षाकृत आसान और नियमित प्रक्रिया थी लेकिन अब आवेदनों की कड़ी जांच की जा रही है और प्रक्रिया भी धीमी व अनिश्चित हो गई है। कुछ कंपनियों को केवल 20% से 40% आवेदन मंजूर होने की जानकारी मिली है, जबकि पहले लगभग सभी आवेदन स्वीकृत हो जाते थे।

तीसरे देशों में शिफ्ट हो रही कारोबारी बैठकें

वीजा में बढ़ती मुश्किलों का असर कंपनियों के कारोबार पर पड़ रहा है। कई भारतीय कंपनियां अब चीन में होने वाली महत्वपूर्ण बैठकों को सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया और हांगकांग जैसे तीसरे देशों में आयोजित करने लगी हैं।

एक प्रमुख चीनी स्मार्टफोन कंपनी ने हाल ही में अपने ट्रेड पार्टनर्स की बैठक शेनझेन से थाईलैंड स्थानांतरित कर दी। बताया गया कि कंपनी के कई भारतीय प्रतिभागी और अधिकारी दो महीने से ज्यादा समय तक वीजा का इंतजार करते रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक, Realme भी अपने फेस्टिव ट्रेड मीट को चीन से बाहर आयोजित करने पर विचार कर रही है। वहीं, चीन में संयुक्त उपक्रम वाली एक भारतीय ऑटो-पार्ट्स कंपनी सिंगापुर में बैठकें करने पर चर्चा कर रही है। एक बड़ी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने भी बार-बार वीजा खारिज होने के बाद अपनी नेतृत्व स्तर की बैठकें सिंगापुर और हांगकांग में स्थानांतरित कर दी हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो सेक्टर पर ज्यादा असर

चीन से मजबूत सप्लाई चेन वाले सेक्टरों पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स और हार्डवेयर प्रमुख हैं। कई भारतीय कंपनियां चीन से कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स और तकनीकी विशेषज्ञता पर निर्भर हैं। ऐसे में फैक्ट्री का निरीक्षण, मशीनों की इंस्टॉलेशन, तकनीकी समस्या का समाधान और सप्लाई चेन से जुड़ी बातचीत के लिए चीन की यात्रा जरूरी होती है।

कुछ मामलों में चीनी कैपिटल गुड्स और कंपोनेंट्स कंपनियों की कुल सप्लाई का 50% तक हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे में वीडियो कॉन्फ्रेंस या तीसरे देशों में बैठकें करना हर स्थिति का पूरा विकल्प नहीं है।

क्या है चीन का बिजनेस वीजा?

चीन के बिजनैस वीजा को एम वीजा कहा जाता है। यह बिजनैस मीटिंग, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अन्य व्यापारिक गतिविधियों के लिए दिया जाता है। यह उन लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है, जो किसी स्थानीय चीनी कंपनी के कर्मचारी नहीं होते लेकिन वे 6 महीने से कम अवधि के लिए चीन की व्यावसायिक यात्रा पर जाते हैं।

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