क्रेडाई ने किफायती मकान बनाने के लिए सरकारी प्रोत्साहन की मांग की

Edited By Updated: 03 Oct, 2026 10:39 AM

credai seeks government incentives for affordable housing construction

रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने कहा कि निर्माण लागत और करों की ऊंची दरों के कारण बिल्डर किफायती मकान बनाने में असमर्थ हैं। संगठन ने सस्ते फ्लैटों की मांग और आपूर्ति को गति देने के लिए सरकार से प्रोत्साहन देने की मांग की। क्रेडाई के

कोलकाताः रियल एस्टेट कंपनियों के शीर्ष निकाय क्रेडाई ने कहा कि निर्माण लागत और करों की ऊंची दरों के कारण बिल्डर किफायती मकान बनाने में असमर्थ हैं। संगठन ने सस्ते फ्लैटों की मांग और आपूर्ति को गति देने के लिए सरकार से प्रोत्साहन देने की मांग की। क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार प्रत्येक फ्लैट के लिए 45 लाख रुपए की अधिकतम मूल्य सीमा को समाप्त करके किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार उद्योग जगत की इस मांग पर ध्यान देगी। 

पटेल ने कहा, ''हम पर्याप्त संख्या में किफायती मकान उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हैं।'' पटेल ने कहा कि जमीन की कीमत, निर्माण की बढ़ती लागत और बिक्री मूल्य पर 30 से 50 प्रतिशत तक के ऊंचे कर किफायती आवास की आपूर्ति बढ़ाने में प्रमुख बाधाएं हैं। 

गौरतलब है कि डेवलपर्स बिक्री मूल्य का 30 से 50 प्रतिशत तक केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और नगर निगमों को कर के रूप में चुकाते हैं। पटेल ने कहा, ''हम इन बाधाओं और चुनौतियों से पार पाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।'' उन्होंने उम्मीद जताई कि सस्ते मकानों की मांग और आपूर्ति को बढ़ाने के लिए अगले छह महीनों में कुछ नीतिगत पहल की जाएगी। 

किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव की मांग पर उन्होंने कहा कि क्रेडाई इस मुद्दे पर सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही है। पटेल ने कहा, ''हम चाहते हैं कि 45 लाख रुपए की अधिकतम सीमा हटाई जाए। किफायती मकान कहलाने के लिए केवल क्षेत्रफल की सीमा होनी चाहिए, जो महानगरों के लिए 60 वर्ग मीटर और गैर-महानगरों के लिए 90 वर्ग मीटर हो।''  

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