Edited By jyoti choudhary,Updated: 07 Oct, 2026 02:36 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी से आगामी त्योहारी सीजन में आवासीय संपत्तियों की मांग पर कुछ असर पड़ सकता है। हालांकि, रियल एस्टेट उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी मांग, बढ़ती आय, शहरीकरण और घर...
नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी से आगामी त्योहारी सीजन में आवासीय संपत्तियों की मांग पर कुछ असर पड़ सकता है। हालांकि, रियल एस्टेट उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत बुनियादी मांग, बढ़ती आय, शहरीकरण और घर खरीदने की दीर्घकालीन जरूरत के कारण बाजार पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।
आरबीआई ने बुधवार को रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो दर में बढ़ोतरी की है। इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले होम लोन की ब्याज लागत बढ़ने की संभावना है।
नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि फिलहाल आवासीय मांग मजबूत बनी हुई है। खरीदारों की सकारात्मक धारणा, त्योहारी मांग और घर खरीदने की दीर्घकालीन जरूरत को देखते हुए रेपो दर में बढ़ोतरी का असर सीमित रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि त्योहारी अवधि रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है और इस दौरान ब्याज दरों में स्थिरता घर खरीदारों के लिए सकारात्मक रहती है।
क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल ने कहा कि रेपो दर बढ़ने से कर्ज लेने की लागत बढ़ेगी, जिसका बिक्री पर कुछ असर पड़ सकता है। हालांकि, आने वाले त्योहारों के दौरान आवास बाजार में मांग मजबूत रहने की उम्मीद है।
कीमत-संवेदनशील खरीदारों पर ज्यादा असर
कोलियर्स इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक एवं शोध प्रमुख विमल नादर ने कहा कि रेपो दर में बढ़ोतरी महंगाई और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से जुड़े दबाव को लेकर आरबीआई के सतर्क रुख को दर्शाती है। उनके मुताबिक, निकट अवधि में मांग कुछ नरम पड़ सकती है लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र की मजबूत बुनियाद इसके असर को सीमित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि खासकर कीमत के प्रति संवेदनशील वर्ग के खरीदार ऊंची ब्याज दरों के कारण अपने खरीद फैसले पर अधिक विचार कर सकते हैं। ऐसे में डेवलपर बिक्री बढ़ाने के लिए त्योहारी छूट, आकर्षक भुगतान योजनाओं और अन्य प्रोत्साहनों का सहारा ले सकते हैं।
डेवलपर्स को बिक्री बनाए रखने की चुनौती
सिग्नेचर ग्लोबल के चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं, मुद्रा पर दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच आरबीआई का फैसला महंगाई को नियंत्रित करने की प्राथमिकता को दिखाता है। हालांकि, बढ़ती आय, शहरीकरण और घर खरीदने की बढ़ती इच्छा के कारण आवास की बुनियादी मांग मजबूत बनी हुई है।
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी ने कहा कि ब्याज दर बढ़ने से कर्ज की लागत में कुछ वृद्धि होगी, लेकिन रोजगार और बुनियादी ढांचे के अच्छे अवसर वाले बाजारों में घर खरीदने की मांग जारी रहने की उम्मीद है।
वहीं, निंबस ग्रुप के सीईओ साहिल अग्रवाल ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र मजबूत स्थिति में है। महानगरों के साथ-साथ छोटे और मझोले शहरों में भी बुनियादी ढांचे के विकास और नए अवसरों के चलते आवासीय मांग बनी रहने की उम्मीद है।