Edited By Ramkesh,Updated: 09 Oct, 2026 07:05 PM

पश्चिम बंगाल में लगभग चार महीने पहले सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को विधानसभा उपचुनावों में भी अपना दबदबा कायम रखते हुए नंदीग्राम सीट पर जीत दर्ज कर ली है। CM शुभेंदु ने नंदीग्राम उपचुनाव में जीत के लिए हासीरानी रथ को बधाई दी...
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में लगभग चार महीने पहले सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को विधानसभा उपचुनावों में भी अपना दबदबा कायम रखते हुए नंदीग्राम सीट पर जीत दर्ज कर ली है। CM शुभेंदु ने नंदीग्राम उपचुनाव में जीत के लिए हासीरानी रथ को बधाई दी है। आप को बता दें कि भाजपा ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर 75,816 मतों के अंतर से जीत दर्ज की, जो मुस्लिम-बहुल निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी की एक बड़ी सफलता है। निर्वाचन आयोग के नतीजों के मुताबिक, उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार शंकरव सरकार को 1,29,914 वोट मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद को हराया, जिन्हें 54,098 वोट मिले। भाजपा को लगभग 63.14 प्रतिशत वोट मिले, जबकि आजाद को 26.29 प्रतिशत वोट हासिल हुए।
यह जीत विपक्ष के बिखराव के बीच मिली, क्योंकि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और उससे अलग हुई डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (डीटीएमसी) कोई मजबूत चुनौती पेश करने में नाकाम रहीं। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल्लाहिल काफी को 6,168 वोट मिले, जो तृणमूल कांग्रेस के ममता गुट के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी से थोड़े ही आगे रहे, जिन्हें 3,847 वोट मिले। डीटीएमसी उम्मीदवार सफीउज़्ज़मां शेख को 2,044 वोट मिले, जबकि माकपा उम्मीदवार के खाते में 3,797 वोट गए। रेजीनगर में लगभग 70 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं और यहाँ पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला होता रहा है।
भाजपा की जीत ने इस क्षेत्र में बदलते चुनावी समीकरणों की ओर ध्यान खींचा है, हालांकि केवल इस नतीजे से यह पता नहीं चलता कि अलग-अलग समुदायों ने किस तरह वोट दिया। एजेयूपी के संस्थापक हुमायूँ कबीर के सीट खाली करने के बाद उपचुनाव आवश्यक हो गया था। कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस नेता थे और बाद में उन्होंने एजेयूपी बनाई। उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर सीट 58,000 से अधिक मतों से जीती थी, लेकिन उन्होंने नवादा सीट अपने पास रखी। उनके बेटे गुलाम नबी आज़ाद ने एजेयूपी के टिकट पर उपचुनाव लड़ा था।