Edited By jyoti choudhary,Updated: 04 Apr, 2026 02:54 PM

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच रूस ने भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बढ़ाने की पेशकश की है। रूस के पहले उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के हालिया नई दिल्ली दौरे के दौरान यह प्रस्ताव सामने आया।...
बिजनेस डेस्कः वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच रूस ने भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बढ़ाने की पेशकश की है। रूस के पहले उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के हालिया नई दिल्ली दौरे के दौरान यह प्रस्ताव सामने आया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इन बैठकों में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा रहा।
वैश्विक संकट के बीच पहल
यह पेशकश ऐसे समय में आई है जब वेस्ट एशिया संकट के कारण वैश्विक तेल और गैस बाजार दबाव में हैं। खासतौर पर Strait of Hormuz में बाधा से स्थिति और गंभीर हो गई है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल और LNG का ट्रांजिट होता है।
व्यापार और उर्वरक सप्लाई पर भी जोर
भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में ऊर्जा के अलावा व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग पर भी चर्चा हुई। रूस ने बताया कि भारत को उर्वरक सप्लाई में 2025 के अंत तक 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और आगे भी मांग पूरी करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
2030 तक बड़ा लक्ष्य
दोनों देशों ने व्यापार, तकनीक, कनेक्टिविटी और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही, Vladimir Putin के साथ हुई पिछली वार्ता के आधार पर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य की समीक्षा भी की गई। रूस ने सिविल न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है।