Edited By jyoti choudhary,Updated: 09 Apr, 2026 12:26 PM

भारत की स्टील इंडस्ट्री FY2031 तक 300 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) क्रूड स्टील क्षमता हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस सेक्टर में मजबूत प्रदर्शन किया है और ग्रोथ के मामले में...
बिजनेस डेस्कः भारत की स्टील इंडस्ट्री FY2031 तक 300 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) क्रूड स्टील क्षमता हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस सेक्टर में मजबूत प्रदर्शन किया है और ग्रोथ के मामले में चीन और वैश्विक औसत को भी पीछे छोड़ दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2016 से 2024 के बीच भारत की स्टील प्रोडक्शन ग्रोथ लगभग 5% CAGR रही, जबकि चीन में यह 2.76% और वैश्विक स्तर पर 1.77% दर्ज की गई।
अनिल अग्रवाल की बड़ी चेतावनी
इस तेज रफ्तार के बीच वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने एक बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 300 MTPA (30 करोड़ टन) स्टील उत्पादन का लक्ष्य अधूरा रह सकता है।

आयरन ओर की भारी कमी बन सकती है सबसे बड़ी बाधा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अनिल अग्रवाल ने बताया, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को हर साल करीब 800 मिलियन टन आयरन ओर की जरूरत होगी लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए देश को अपनी जरूरत का लगभग 75% आयरन ओर आयात करना पड़ सकता है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के विपरीत है।
भारत को चाहिए 3-4 ग्लोबल स्तर की बड़ी माइनिंग कंपनियां
उन्होंने वैश्विक उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया में आयरन ओर उत्पादन का बड़ा हिस्सा कुछ कंपनियों के पास केंद्रित है, जैसे Vale, BHP, Rio Tinto और Fortescue। ये कंपनियां मिलकर 70-80% उत्पादन नियंत्रित करती हैं।
अग्रवाल का सुझाव है कि भारत को भी 3-4 ऐसी बड़ी कंपनियां तैयार करनी चाहिए, जो हर साल 200-300 मिलियन टन आयरन ओर का उत्पादन कर सकें। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उत्पादन को मजबूती मिलेगी।
20-25 अरब डॉलर निवेश की जरूरत
स्टील और माइनिंग सेक्टर को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश जरूरी है। अनुमान के मुताबिक, करीब 20 से 25 अरब डॉलर (या उससे ज्यादा) का निवेश खनन, लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में करना होगा। अग्रवाल का कहना है कि बिना इस निवेश के भारत के लिए 300 MTPA का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।
नीतियों में सुधार और तेज क्लियरेंस जरूरी
उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि माइनिंग सेक्टर में नीतियों को सरल और मंजूरी प्रक्रिया को तेज किया जाना चाहिए। अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां ऑयल और गैस सेक्टर में आसान क्लियरेंस से प्रोडक्शन और निवेश दोनों बढ़े हैं।
अग्रवाल के मुताबिक, माइनिंग और हाइड्रोकार्बन सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होते हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और लोगों की आय व जीवन स्तर में सुधार होता है।