अब नहीं होगी LPG की किल्लत! 15,400 टन रसोई गैस लेकर भारत पहुंचा जहाज

Edited By Updated: 09 Apr, 2026 12:55 PM

no more lpg shortages ship carrying 15 400 tons of cooking gas arrives in india

नवी मुंबई के समुद्री तट से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच रसोई गैस (LPG) लेकर एक भारतीय जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया है। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (Jawaharlal Nehru Port Authority) ने गुरुवार, 9...

बिजनेस डेस्कः नवी मुंबई के समुद्री तट से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच रसोई गैस (LPG) लेकर एक भारतीय जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया है। जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (Jawaharlal Nehru Port Authority) ने गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को जानकारी दी कि 15,400 टन LPG लेकर आ रहा एक बड़ा जहाज सफलतापूर्वक नवी मुंबई पोर्ट पर पहुंच चुका है।

यह उपलब्धि इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इस जहाज ने दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz को पार किया, जहां फिलहाल Iran, United States और Israel के बीच तनाव चरम पर है।

'Green Asha' ने दिखाई मजबूती

ग्रीन आशा (Green Asha) नाम का यह भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से अपनी मंजिल तक पहुंच गया है। इसे पोर्ट के उस विशेष बर्थ पर लगाया गया है, जिसे भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) मिलकर संचालित करते हैं।

पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहला ऐसा जहाज है, जो इतने जोखिम भरे माहौल के बावजूद सीधे इस पोर्ट तक पहुंचा है। अधिकारियों के मुताबिक, यह भारत की समुद्री क्षमता और रणनीतिक तैयारी का मजबूत संकेत है।

क्रू और कार्गो पूरी तरह सुरक्षित

इस मिशन की सबसे राहत भरी बात यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी क्रू सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। साथ ही, 15,400 टन LPG की खेप और जहाज को भी कोई नुकसान नहीं हुआ है।

पोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, यह घटना दिखाती है कि भारत कठिन वैश्विक परिस्थितियों में भी जरूरी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में सक्षम है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम कदम

नवा शेवा पोर्ट (Nhava Sheva Port) देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां से गैस और तेल की सप्लाई देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाई जाती है। ऐसे में इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना न केवल सप्लाई चेन के लिए राहत है, बल्कि यह भरोसा भी देता है कि भारत भविष्य में भी अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रख पाएगा।
 

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