पेट्रोल-डीजल पर घटाई एक्साइज ड्यूटी, सरकार को हो सकता है बड़ा नुकसान!

Edited By Updated: 28 Mar, 2026 11:47 AM

excise duty on petrol and diesel reduced government could face significant loss

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर दी...

बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती कर दी गई है, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना और आम लोगों पर बढ़ते महंगाई के बोझ को कम करना है। मगर इससे अगले वित्त वर्ष में सरकार का राजस्व करीब 1.3 लाख करोड़ रुपए कम हो सकता है।

पेट्रोल-डीजल पर घटाया उत्पाद शुल्क

नई दरों के तहत पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपए से घटाकर शून्य कर दिया गया है। सरकार ने पिछले वर्ष अप्रैल में इन पर 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। साथ ही, घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर फिर से शुल्क लगा दिया गया है। डीजल निर्यात पर 21.5 रुपए और ATF पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क निर्धारित किया गया है।

अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत से 1.4 करोड़ टन पेट्रोल और 2.36 करोड़ टन डीजल का निर्यात हुआ, जिसमें बड़ा हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज का रहा।

15 दिनों में हो सकता है 7,000 करोड़ का नुकसान 

निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि उपभोक्ताओं को कीमतों में संभावित वृद्धि से बचाया जा सके। हालांकि, इस कटौती से सरकारी खजाने पर बड़ा असर पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार, अगले 15 दिनों में ही लगभग 7,000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो सकता है, जबकि पूरे वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 1.3 लाख करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंच सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से तेल विपणन कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन को राहत मिलेगी, जिससे वे कीमतों में वृद्धि का दबाव उपभोक्ताओं पर डालने से बच सकेंगी।

हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि राजस्व में कमी का असर सरकार के पूंजीगत व्यय और राजकोषीय घाटे पर पड़ सकता है। यदि यह कटौती लंबे समय तक जारी रहती है, तो इससे वित्तीय संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
 

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