Edited By Tanuja,Updated: 06 May, 2026 09:15 PM

चीन की अर्थव्यवस्था पर मंदी के संकेत साफ दिख रहे हैं। कमजोर घरेलू मांग, घटती आबादी और निर्यात में गिरावट से विकास पर दबाव बढ़ा है। लगभग 5% वृद्धि के बावजूद पुरानी तेज रफ्तार खत्म हो रही है और भविष्य में स्थिर विकास को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही...
International Desk: चीन की अर्थव्यवस्था अब पहले जैसी तेज रफ्तार से आगे नहीं बढ़ रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कमजोर घरेलू मांग और तेजी से बूढ़ी होती आबादी के कारण आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ता जा रहा है। हालांकि 2025 और 2026 की शुरुआत में चीन लगभग 5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, लेकिन यह पहले के दोहरे अंकों (डबल डिजिट) की तुलना में काफी कम है। रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता घरेलू खपत को बताया गया है। लोगों का खर्च कम हो गया है, जिससे बाजार में मांग घट रही है और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
पहले चीन की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में उपभोग, निवेश और निर्यात तीनों की बड़ी भूमिका थी, लेकिन अब यह संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है। निर्यात क्षेत्र, जो लंबे समय तक चीन की ताकत रहा, अब दबाव में है। वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ते व्यापारिक प्रतिबंधों के कारण चीन के सामान की मांग घट रही है। कई कंपनियां अपने उत्पादन केंद्र दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में स्थानांतरित कर रही हैं, जिससे चीन की स्थिति और कमजोर हो रही है।इसके अलावा चीन की जनसंख्या संरचना भी बड़ी चुनौती बन रही है। देश में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि कामकाजी उम्र की आबादी घट रही है। इससे श्रम की कमी हो रही है और उत्पादन क्षमता पर असर पड़ रहा है। निवेश के मोर्चे पर भी स्थिति कमजोर है।
2025 में स्थिर निवेश में गिरावट दर्ज की गई, जो व्यापारिक विश्वास में कमी और आर्थिक संरचना में बदलाव का संकेत है। उत्पादकता में सुधार भी धीमा हो गया है, जिससे भविष्य की वृद्धि पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में चीन की अर्थव्यवस्था इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी उत्पादकता कैसे बढ़ाता है और घटती कार्यबल की समस्या को कैसे संभालता है। लेकिन जब तक घरेलू मांग मजबूत नहीं होती, तब तक स्थिर और तेज आर्थिक विकास हासिल करना मुश्किल रहेगा।