HSBC ने 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6% किया

Edited By Updated: 11 May, 2026 05:41 PM

hsbc lowered its gdp growth forecast for 2026 27 to 6

विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने सोमवार को कहा कि ऊर्जा संकट और कम बारिश के दोहरे झटकों के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में स्थिर कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर छह प्रतिशत पर आ सकती है, जो 2025-26 में 7.4 प्रतिशत थी। एचएसबीसी ने...

नई दिल्लीः विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने सोमवार को कहा कि ऊर्जा संकट और कम बारिश के दोहरे झटकों के कारण वित्त वर्ष 2026-27 में स्थिर कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर घटकर छह प्रतिशत पर आ सकती है, जो 2025-26 में 7.4 प्रतिशत थी। एचएसबीसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि इन झटकों से मुद्रास्फीति भी बढ़ेगी, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चालू वित्त वर्ष में मुख्य ब्याज दरों में दो बार बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर हो सकता है। 

रिपोर्ट में कहा गया, ''दोनों झटकों को एक साथ मिलाने और कुछ राजकोषीय फिसलन को ध्यान में रखते हुए, हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी छह प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जो पिछले वर्ष के हमारे 7.4 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कम है।'' रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उभरता संकट ग्रामीण परिवारों और छोटी फर्मों सहित संगठित क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका होगा। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने जारी अनुमान के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई है। 

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। एचएसबीसी के अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि अल-नीनो के कारण होने वाले दोहरे संकट और कम बारिश के साथ ही बढ़ता तापमान भी आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, ''हमारा मॉडल बताता है कि अल-नीनो और तापमान का प्रभाव एक साल में मुद्रास्फीति में आधा प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है।'' इसके साथ ही वित्त वर्ष 2026-27 में मुख्य मुद्रास्फीति 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। 

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