FCI ने एथेनॉल कंपनियों को 40% कम कीमत पर बेचा चावल, सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी

Edited By Updated: 29 Jul, 2026 11:55 AM

fci sold rice to ethanol companies at a 40 lower price

देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर जारी बहस के बीच सरकार ने राज्यसभा में खुलासा किया है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने एथेनॉल उत्पादन करने वाली कंपनियों को अपनी खरीद लागत से काफी कम कीमत पर चावल उपलब्ध कराया। सरकार के

बिजनेस डेस्कः देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर जारी बहस के बीच सरकार ने राज्यसभा में खुलासा किया है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने एथेनॉल उत्पादन करने वाली कंपनियों को अपनी खरीद लागत से काफी कम कीमत पर चावल उपलब्ध कराया। सरकार के मुताबिक यह बिक्री ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक) के तहत तय दरों पर की गई और इसे किसी प्रकार की सब्सिडी नहीं माना गया है।

सरकार ने बताया कि जून 2025 से जून 2026 के बीच एथेनॉल कंपनियों को 2,250 से 2,320 रुपए प्रति क्विंटल की दर से चावल बेचा गया। वहीं, इसी अवधि में FCI की औसत खरीद लागत 3,720 से 3,889 रुपए प्रति क्विंटल रही यानी निगम ने अपनी खरीद लागत से करीब 40 प्रतिशत कम कीमत पर चावल उपलब्ध कराया।

किसे मिला सबसे ज्यादा फायदा?

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमूबेन जयंतीभाई बांभनिया ने राज्यसभा में बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान FCI ने एथेनॉल प्लांट्स को 63.5 लाख टन चावल की आपूर्ति की, जिसकी कुल कीमत 14,596.78 करोड़ रुपए रही।

आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 8.44 लाख टन चावल हरियाणा की एथेनॉल इकाइयों को मिला। इसके बाद उत्तर प्रदेश को 8.39 लाख टन, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को संयुक्त रूप से 6.59 लाख टन, पश्चिम बंगाल को 5.85 लाख टन और मध्य प्रदेश को 4.32 लाख टन चावल उपलब्ध कराया गया।

सरकार ने बताया कि ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत जून से अक्टूबर 2025 तक चावल की कीमत 2,250 रुपए प्रति क्विंटल तय थी। नवंबर 2025 से इसे बढ़ाकर 2,320 रुपए प्रति क्विंटल किया गया, जबकि नवंबर 2026 से जून 2027 तक यह दर 2,390 रुपए प्रति क्विंटल रहेगी।

एथेनॉल उत्पादकों को प्रत्यक्ष सब्सिडी नहीं 

मंत्री ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल उत्पादकों को किसी प्रकार की प्रत्यक्ष सब्सिडी नहीं दी जा रही है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जब चावल की बिक्री उसकी आर्थिक लागत से कम कीमत पर की जाती है, तो इसे अप्रत्यक्ष सब्सिडी के रूप में देखा जा सकता है।

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि 2026-27 के एथेनॉल सप्लाई वर्ष में FCI के भंडार से लगभग 72 लाख टन चावल बेचने की योजना है। इसकी अनुमानित बिक्री कीमत 23,900 रुपए प्रति टन होगी, जबकि आर्थिक लागत करीब 43,100 रुपए प्रति टन बताई गई है। ऐसे में लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर खाद्य सब्सिडी के बोझ को प्रभावित कर सकता है।

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