Gold High Jump: 1.22 लाख से ₹1.31 लाख तक, सोने में ताबड़तोड़ तेजी, Experts ने बताया कहां तक जाएंगी कीमतें

Edited By Updated: 03 Dec, 2025 03:07 PM

gold prices surge jumping 8 600 in two weeks

gold price in last 2 weeks: फेडरल रिज़र्व की संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदों ने सोने की कीमतों को जोरदार बढ़त दे दी है। 18 नवंबर के निचले स्तर के बाद से गोल्ड के दाम लगभग ₹8,600 प्रति 10 ग्राम चढ़ चुके हैं यानी सिर्फ दो हफ्तों में 7% की तेजी।...

बिजनेस डेस्कः फेडरल रिज़र्व की संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदों ने सोने की कीमतों को जोरदार बढ़त दे दी है। 18 नवंबर के निचले स्तर के बाद से गोल्ड के दाम लगभग ₹8,600 प्रति 10 ग्राम चढ़ चुके हैं यानी सिर्फ दो हफ्तों में 7% की तेजी। बुधवार को MCX पर सोना ₹1,196 की तेजी के साथ ₹1,30,955 के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सोना फिलहाल अपने लाइफटाइम हाई ₹1,34,024 से करीब ₹3,000 नीचे है।

दो हफ्तों में आई कितनी तेजी?

18 नवंबर को सोने के दाम 1,22,351 रुपए के साथ लोअर लेवल पर कारोबार कर रहे थे, जिसमें अब तक गोल्ड की कीमतों में 8,604 रुपए प्रति दस ग्राम का इजाफा देखने को मिल चुका है। अगर बात दिसंबर महीने की करें तो सोने की कीमतों में 1451 रुपए प्रति दस ग्राम की बढ़ोतरी देखने को मिल चुकी है।   

क्या 1.50 लाख पर जाएगा गोल्ड?

आने वाले महीनों में सोने के 1.5 लाख रुपए तक पहुंचने की संभावना। रिलायंस सिक्योरिटीज के जिगर त्रिवेदी ने कहा कि कीमती धातुओं में हालिया उछाल – COMEX और MCX पर चांदी के नए लाइफटाइम हाई पर पहुंचने से – ने सोने के लिए एक मजबूत तेजी की पृष्ठभूमि को और मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि COMEX गोल्ड को गिरते वास्तविक यील्ड, फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों, कमजोर अमेरिकी डॉलर और केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी का फायदा मिल रहा है। साथ ही, बढ़ती जियो पॉलिटिकल और व्यापक आर्थिक अनिश्चितता सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ा रही है। 

त्रिवेदी ने कहा कि सोना उस स्तर पर पहुंच रहा है जहां शॉर्ट टर्म कंसोलिडेशन या मुनाफावसूली की संभावना है। फिर भी, संरचनात्मक डिमांड और मौजूदा वैश्विक जोखिम चिंताओं के कारण मध्यम अवधि का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि 1.5 लाख रुपए का लक्ष्य व्यापक रूप से देखा जा रहा है, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों विश्लेषकों का सुझाव है कि आगे की राह में अल्पकालिक अस्थिरता शामिल हो सकती है और व्यापक रुझान अभी भी तेज़ रफ़्तार के पक्ष में झुका हुआ है।
 

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