Edited By jyoti choudhary,Updated: 03 Apr, 2026 06:00 PM

पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर भारत के आयात-निर्यात पर भी दिख रहा है। सबसे अधिक प्रभाव सूखे मेवों के आयात और चावल के निर्यात पर पड़ा है। भारत में ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेज उछाल आया है। ईरान और अफगानिस्तान से...
बिजनेस डेस्कः पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर भारत के आयात-निर्यात पर भी दिख रहा है। सबसे अधिक प्रभाव सूखे मेवों के आयात और चावल के निर्यात पर पड़ा है। भारत में ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में तेज उछाल आया है। ईरान और अफगानिस्तान से आने वाले ड्राई फ्रूट्स दिल्ली नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे बादाम, पिस्ता, अंजीर, हींग और खजूर जैसी चीजों की कीमतों में 25-30% तक बढ़ोतरी हो चुकी है। 19 अप्रैल से शुरू होने वाले शादी के सीजन में इनकी मांग और बढ़ने की संभावना है, जिससे आम खरीदारों की जेब पर और दबाव पड़ेगा।
दिल्ली की खारी बावली मंडी के एक कारोबारी के मुताबिक, ईरान से आने वाले मामरा बादाम, पिस्ता, पिस्ता मगज, अंजीर, हींग, खजूर और बादाम की कीमतों में पहले ही 25% तक इजाफा हो चुका है। मुनक्का, खजूर, ईरानी रिंग, खुबानी और शाहजीरा में भी 10-15% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 19 अप्रैल से शुरू होने वाले शादी के सीजन में इनकी मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों में 10-15% और इजाफा हो सकता है। इस समय दिल्ली में बादाम 1,240 रुपए, पिस्ता 1,500 रुपए, अंजीर 1,600 रुपए और हींग 6,000 रुपए प्रति किलो बिक रही है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक
सूखे मेवों के साथ-साथ चावल के निर्यात पर भी असर पड़ा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है और ईरान को बासमती और सेला चावल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से चावल का निर्यात 30-35% तक घट गया है। अब व्यापारी वैकल्पिक मार्गों से चावल भेजने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे भाड़ा और लागत चार गुना तक बढ़ गई है।
छोटे निर्यातकों को भारी नुकसान
दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश गुप्ता के अनुसार, अधिकांश कंटेनर यूरोप और अमेरिका जाने वाले जहाजों से भेजे जाते थे, जो अब होर्मुज स्ट्रेट से नहीं जा पा रहे। कुछ व्यापारी ओमान मार्ग से सड़क परिवहन कर रहे हैं लेकिन इससे छोटे निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है। कई कंटेनर विदेश नहीं जा पा रहे, जिससे करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।
व्यापारी इस युद्ध की अवधि और इसके आयात-निर्यात पर दीर्घकालिक असर को लेकर चिंतित हैं। फिलहाल, कीमतों में बढ़ोतरी और वितरण बाधाओं ने बाजार को अस्थिर कर दिया है, जिससे न केवल व्यापारी बल्कि उपभोक्ता भी महंगे ड्राई फ्रूट्स और चावल का सामना कर रहे हैं।