Edited By Pardeep,Updated: 21 May, 2026 01:14 AM

ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से जारी युद्ध ने जहां पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, वहीं इस वैश्विक तनाव के बीच रूस की 'चांदी' हो रही है। तेल की भारी बिक्री के कारण रूस की मुद्रा 'रूबल' दुनिया की नंबर-1 करेंसी बनकर उभरी है।
नई दिल्ली/मास्को: ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से जारी युद्ध ने जहां पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, वहीं इस वैश्विक तनाव के बीच रूस की 'चांदी' हो रही है। तेल की भारी बिक्री के कारण रूस की मुद्रा 'रूबल' दुनिया की नंबर-1 करेंसी बनकर उभरी है।
फरवरी 2023 के बाद सबसे मजबूत स्तर पर रूबल
ब्लूमबर्ग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल की शुरुआत से अब तक रूबल में करीब 12 प्रतिशत की मजबूती देखी गई है। वर्तमान में यह 72.6 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है, जो फरवरी 2023 के बाद का इसका सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों और सरकारी अनुमानों के विपरीत, रूबल लगातार दूसरे साल अपनी मजबूती बनाए हुए है।
क्यों बढ़ रही है रूबल की ताकत?
रूस की इस आर्थिक मजबूती के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
- तेल की बढ़ती बिक्री: वैश्विक संघर्षों के बीच रूस की तेल बिक्री से होने वाली आय ने रूबल को शीर्ष पर पहुंचा दिया है।
- सख्त मौद्रिक नीति: रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान भारी सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के लिए अपनी ब्याज दरें ऊंची रखी हैं, जिससे विदेशी मुद्रा की मांग में कमी आई है।
- प्रतिबंधों का असर: रूस पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सरकार की सख्त नीतियों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से मुद्रा को सहारा दिया है।
65-70 तक पहुंच सकता है भाव
रूस के अर्थव्यवस्था मंत्री मैक्सिम रेशेट्निकोव का मानना है कि रूस का मौजूदा आर्थिक मॉडल आने वाले वर्षों में भी रूबल को मजबूत रखेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहता है और तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो रूबल और अधिक मजबूत होकर 65-70 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है।
बजट को लेकर सरकार बेफिक्र
रूसी वित्त मंत्री एंटोन सिलुनॉय ने स्पष्ट किया है कि सरकार फिलहाल रूबल की इस मजबूती को लेकर परेशान नहीं है। उनका कहना है कि तेल से होने वाली वर्तमान आय रूस की बजटीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है।