Edited By jyoti choudhary,Updated: 04 Jun, 2026 04:06 PM

पुणे स्थित आईटी कंपनी थिंकटेक इंडिया के अचानक बंद होने से 700 से अधिक कर्मचारी मुश्किल में पड़ गए। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला और कंपनी प्रबंधन की ओर से स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। मामले के सामने...
बिजनेस डेस्कः पुणे स्थित आईटी कंपनी थिंकटेक इंडिया के अचानक बंद होने से 700 से अधिक कर्मचारी मुश्किल में पड़ गए। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं मिला और कंपनी प्रबंधन की ओर से स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
भर्ती के बड़े वादे, फिर बदले हालात
कर्मचारियों के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2025 में बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाया था। फ्रेशर्स, सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और इंटर्न्स को आकर्षक करियर अवसरों तथा बेहतर भविष्य का भरोसा दिलाया गया था। शुरुआती दौर में वेतन और स्टाइपेंड समय पर मिलने से कर्मचारियों का विश्वास बना रहा लेकिन बाद में भुगतान में देरी शुरू हो गई।
वेतन नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
कई कर्मचारियों का कहना है कि इस वर्ष की शुरुआत से वेतन नियमित रूप से मिलना बंद हो गया। प्रबंधन की ओर से वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं का हवाला देते हुए जल्द भुगतान का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन बकाया राशि लगातार बढ़ती गई।
बंद मिला कार्यालय, संपर्क से बाहर अधिकारी
स्थिति तब गंभीर हो गई जब कर्मचारी रोज की तरह कार्यालय पहुंचे और कंपनी का दफ्तर बंद पाया। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। कई कर्मचारियों को अपनी नौकरी की स्थिति के बारे में भी कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई।
बाउंस हुए चेक, बढ़ा आर्थिक दबाव
कर्मचारियों ने दावा किया कि बकाया भुगतान के लिए कंपनी द्वारा जारी किए गए कुछ चेक बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गए। इससे पहले से आर्थिक संकट का सामना कर रहे कर्मचारियों की मुश्किलें और बढ़ गईं।
सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर भी आरोप
कुछ कर्मचारियों और इंटर्न्स का आरोप है कि कंपनी ने जॉइनिंग प्रक्रिया या लैपटॉप उपलब्ध कराने के नाम पर 15,000 रुपये तक का सिक्योरिटी डिपॉजिट लिया था। उनका कहना है कि यह राशि अब तक वापस नहीं की गई। कुछ इंटर्न्स ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें न तो वादा किया गया उपकरण मिला और न ही निर्धारित स्टाइपेंड।
पुलिस जांच तेज, CEO गिरफ्तार
मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने कंपनी के CEO को कथित धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियां कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड और प्रशासनिक गतिविधियों की जांच कर रही हैं। कंपनी के ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट प्रमुख तथा एचआर मैनेजर भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कर्मचारियों के समर्थन में कई प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। लोगों ने युवाओं के करियर पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई। वहीं, कई यूजर्स ने नौकरी तलाशने वालों को ऐसी कंपनियों से सावधान रहने की सलाह दी जो भर्ती प्रक्रिया के दौरान सिक्योरिटी डिपॉजिट की मांग करती हैं।
कर्मचारियों के अधिकारों पर उठे सवाल
इस घटना ने निजी क्षेत्र में नौकरी की सुरक्षा, कर्मचारियों के अधिकारों और भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। प्रभावित कर्मचारी अब अपने बकाया वेतन और जमा राशि की वापसी की उम्मीद में जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।