पेट्रोल-डीजल कीमतों को लेकर IMF की भारत को सलाह, आम आदमी पर बढ़ सकता है बोझ

Edited By Updated: 08 May, 2026 11:43 AM

imf advises india on petrol and diesel prices

विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि...

बिजनेस डेस्कः विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद देश में एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में ईंधन महंगा हो सकता है। हालांकि सरकार अब तक कीमतों में बढ़ोतरी की संभावनाओं से इनकार करती रही है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) चाहता है कि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डाला जाए।

ईरान संकट से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंच चुकी है। कुछ समय के लिए यह 126 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच गई थी। तेल कीमतों में इस तेजी का सीधा असर सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर पड़ा है। कंपनियां खुदरा कीमतों को स्थिर रखने के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठा रही हैं, जिससे उन पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

हाल के दिनों में सरकारी ईंधन कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी, औद्योगिक डीजल और विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की है। वहीं घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, कमर्शियल एलपीजी (19 किलो) की कीमत में हाल ही में अचानक 993 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। यह इस बात का संकेत है कि कुछ खास क्षेत्रों में कीमतों में बदलाव का सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका है।

IMF की भारत से अपील

इस बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत से अपील की है कि ईंधन की कीमतों को वैश्विक बाजार के अनुसार तय होने दिया जाए। आईएमएफ का कहना है कि कृत्रिम रूप से कीमतों को नियंत्रित रखना लंबे समय तक संभव नहीं है। संस्था के अधिकारियों का मानना है कि बाजार आधारित मूल्य प्रणाली से मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहेगा तथा ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

हालांकि भारतीय नीति निर्माताओं का कहना है कि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत है और सरकार जरूरत पड़ने पर आम लोगों को राहत देने के लिए कदम उठाती रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में सरकार के सामने महंगाई नियंत्रण और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी।

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