Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 May, 2026 04:17 PM

बुधवार को वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली, जब कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 7% टूटकर 102.22 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (WTI) भी 8% तक गिरकर लगभग...
बिजनेस डेस्कः बुधवार को वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली, जब कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 7% टूटकर 102.22 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (WTI) भी 8% तक गिरकर लगभग 94.36 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। यह गिरावट सिर्फ कमोडिटी मार्केट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर महंगाई, शेयर बाजार और आम लोगों की जेब तक महसूस किया गया।
गिरावट की मुख्य वजह: अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी
तेल की कीमतों में इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच शुरुआती समझौते की संभावना बन रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि अमेरिका अपने नेवल मिशन “प्रोजेक्ट फ्रीडम” को फिलहाल रोक रहा है। यह मिशन Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षा से जुड़ा था, जो दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई का अहम मार्ग है। इस क्षेत्र में तनाव कम होने से सप्लाई बाधित होने का खतरा घटा और बाजार में बिकवाली बढ़ गई।
मुनाफावसूली और मांग की चिंता
हाल के दिनों में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसके अलावा ऊंची कीमतों के कारण मांग घटने की आशंका भी बाजार पर दबाव बना रही थी। अब कीमतों में गिरावट से उम्मीद जताई जा रही है कि मांग धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है।
शेयर बाजार में दिखा सकारात्मक असर
तेल की कीमतों में गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी सकारात्मक रहा। BSE Sensex लगभग 940 अंक चढ़कर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में करीब 298 अंकों की तेजी दर्ज की गई। सस्ता तेल कंपनियों की लागत घटाता है, जिससे मुनाफे की संभावना बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है।