भारत ने 88% गोला-बारूद उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की: रक्षा मंत्री

Edited By Updated: 26 Feb, 2025 03:16 PM

india achieved self sufficiency in 88 ammunition production

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के रक्षा निर्यात 23,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गए हैं और देश ने गोला-बारूद उत्पादन में 88% आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2029 तक रक्षा...

नई दिल्लीः केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के रक्षा निर्यात 23,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गए हैं और देश ने गोला-बारूद उत्पादन में 88% आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपए तक ले जाना है।

राजनाथ सिंह आईआईटी मंडी के 16वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वॉरफेयर, साइबर सुरक्षा, स्वदेशी एआई चिप निर्माण और क्वांटम टेक्नोलॉजी में अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने आईआईटी मंडी और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से इन क्षेत्रों में अनुसंधान करने और देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का आग्रह किया।

तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर

रक्षा मंत्री ने छात्रों से तकनीकी नवाचार अपनाने और "IIT" (Initiate, Improve, Transform) मंत्र के माध्यम से भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "हमें एआई-आधारित युद्ध प्रणाली, स्वदेशी एआई चिप्स और साइबर सुरक्षा के लिए फायर बेल्ट्स विकसित करने की जरूरत है।"

तेजी से बढ़ रहा रक्षा और डिजिटल क्षेत्र

राजनाथ सिंह ने भारत की तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति पर जोर देते हुए कहा कि अगले पांच वर्षों में यह क्षेत्र 300-350 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। उन्होंने युवाओं को एआई, मशीन लर्निंग और डिजिटल टेक्नोलॉजी में नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आईआईटी मंडी के शोधकर्ता रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) पर अच्छा काम कर रहे हैं, जिससे भारत की रक्षा और तकनीकी क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।

इसके अलावा, उन्होंने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता पर चर्चा की और बताया कि भारतीय दूरसंचार उद्योग दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उद्योग बन गया है। साथ ही, यूपीआई ने डिजिटल पेमेंट्स के लिए वैश्विक मानक स्थापित किए हैं।

  

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