भारत, दक्षिण एशिया की विमानन कंपनियों को 2044 तक करीब 3,300 नए विमानों की आवश्यकता

Edited By Updated: 28 Jan, 2026 02:45 PM

india and other south asian airlines will need approximately 3 300 new aircraft

भारत और दक्षिण एशिया की विमानन कंपनियों को हवाई यातायात की बढ़ती मांग से 2044 तक करीब 3,300 नए विमानों की आवश्यकता होगी। विमान बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग ने बुधवार को एक रिपोर्ट में कहा कि अनुमानित आपूर्ति में से करीब 90 प्रतिशत यानी 2,875...

हैदराबादः भारत और दक्षिण एशिया की विमानन कंपनियों को हवाई यातायात की बढ़ती मांग से 2044 तक करीब 3,300 नए विमानों की आवश्यकता होगी। विमान बनाने वाली अमेरिकी कंपनी बोइंग ने बुधवार को एक रिपोर्ट में कहा कि अनुमानित आपूर्ति में से करीब 90 प्रतिशत यानी 2,875 ‘सिंगल-आइल' विमान यानी एक गलियारा वाले विमान होंगे जबकि चौड़े आकार के विमानों की संख्या 395 होगी। दक्षिण एशिया के लिए अपने ‘वाणिज्यिक बाजार परिदृश्य' (सीएमओ) में बोइंग ने कहा कि अगले दो दशकों में इस क्षेत्र की विमानन कंपनियों को करीब 45,000 पायलट, 45,000 तकनीशियन और चालक दल के 51,000 सदस्यों की आवश्यकता होगी। 

बोइंग के यूरेशिया एवं भारतीय उपमहाद्वीप के वाणिज्यिक विपणन के प्रबंध निदेशक अश्विन नायडू ने कहा कि भारत एक विकासशील बाजार है और देश में विमानों की संख्या में और वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि भारत सबसे तेजी से विकसित होने वाला क्षेत्र है जहां अगले 20 वर्ष में बेड़े की संख्या चार गुना हो जाएगी। नायडू ने शहर में आयोजित चार दिवसीय विमानन शिखर सम्मेलन ‘विंग्स इंडिया' 2026 के दौरान इस रिपोर्ट को पेश किया। बोइंग के अनुसार, ‘‘बढ़ते मध्यम वर्ग, आर्थिक वृद्धि तथा हवाई अड्डों एवं संपर्क में निवेश से भारत और दक्षिण एशिया में यात्री हवाई यातायात अगले 20 वर्ष में औसतन सात प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ेगा।''

रिपोर्ट के अनुसार, हवाई यात्रा की बढ़ती मांग का मतलब है कि विमानन कंपनियों को 2044 तक करीब 3,300 नए विमान की आवश्यकता होगी। इसमें कहा गया, ‘‘वृद्धि और पुराने विमानों का बदले जाने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, भारतीय तथा दक्षिण एशियाई क्षेत्र के विमानों का बेड़ा दो दशकों में 795 से चार गुना होकर 2,925 हो जाएगा। इसमें कहा गया है कि भारत के अंतरराष्ट्रीय यात्री एवं मालवाहक यातायात के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने के साथ ही भारतीय और दक्षिण एशियाई विमानन कंपनियों के लंबी दूरी के नेटवर्क का विस्तार एवं विविधीकरण करने की उम्मीद है। इसके अलावा, बोइंग ने कहा कि दक्षिण एशिया क्षेत्र के उद्योग में निवेश के लिए विमानन सेवाओं में 195 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी जिसमें रखरखाव, मरम्मत एवं बदलाव, डिजिटल सेवाएं व प्रशिक्षण शामिल हैं। भारत में उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि और ई-कॉमर्स की बढ़ती भूमिका से हवाई मालवाहक बाजार को बढ़ावा मिलेगा। इससे अधिक मालवाहक विमानों की आवश्यकता होगी। 
 

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