PF Rules: EPFO कर्मचारियों के लिए अहम खबर, नए लेबर कोड के बीच PF को लेकर बड़ा अपडेट

Edited By Updated: 13 Mar, 2026 05:20 PM

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अगर आप नौकरीपेशा हैं और अपने भविष्य निधि यानी पीएफ (PF) से जुड़े नियमों को लेकर किसी तरह की चिंता में हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की मौजूदा...

बिजनेस डेस्कः अगर आप नौकरीपेशा हैं और अपने भविष्य निधि यानी पीएफ (PF) से जुड़े नियमों को लेकर किसी तरह की चिंता में हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की मौजूदा व्यवस्था में अचानक कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा।

राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बताया कि फिलहाल सरकार की योजना EPFO के मौजूदा नियमों में तुरंत बड़े बदलाव करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि नए श्रम कानून लागू होने की स्थिति में भी कर्मचारियों के पीएफ और अन्य सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ पहले की तरह जारी रहेंगे।

दरअसल, सरकार ने देश के पुराने और जटिल श्रम कानूनों को सरल बनाने के लिए चार नए लेबर कोड तैयार किए हैं। इनमें कोड ऑन वेजेस (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020), ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड (2020) और सोशल सिक्योरिटी कोड (2020) शामिल हैं। इन चारों में से सोशल सिक्योरिटी कोड सीधे तौर पर पीएफ, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ा हुआ है।

EPFO योजनाएं तुरंत बंद नहीं होंगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब यह कोड पूरी तरह लागू होगा तब भी मौजूदा EPFO योजनाएं तुरंत समाप्त नहीं होंगी। सोशल सिक्योरिटी कोड के प्रावधानों के अनुसार, नया कानून लागू होने के बाद कम से कम एक साल तक पुरानी योजनाएं पहले की तरह चलती रहेंगी, बशर्ते वे नए कानून के प्रावधानों से टकराव में न हों।

नए लेबर कोड का एक अहम उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाना भी है। अब तक पीएफ, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाएं मुख्य रूप से संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों तक सीमित थीं लेकिन नए नियमों में गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स जैसे फूड डिलीवरी पार्टनर और ऐप आधारित ड्राइवरों को भी इसमें शामिल करने का प्रावधान किया गया है।

ग्रेच्युटी के नियमों में बदलाव 

इसके अलावा फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी के नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। जहां पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम पांच साल की नौकरी जरूरी थी, वहीं नए प्रावधानों के तहत एक साल की सेवा के बाद भी कर्मचारी ग्रेच्युटी के हकदार हो सकते हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि पीएफ पर मिलने वाली ब्याज दर सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की सिफारिशों के आधार पर तय की जाती है। इस बोर्ड में सरकार, नियोक्ता और कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। EPFO अपने निवेश से जो कमाई करता है, उसी के आधार पर सदस्यों के खातों में ब्याज दिया जाता है, ताकि संस्था की आर्थिक स्थिरता भी बनी रहे और कर्मचारियों को बेहतर रिटर्न भी मिल सके।
 

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