Edited By Rohini Oberoi,Updated: 26 Mar, 2026 11:51 AM

महाराष्ट्र के नासिक में बोर्ड परीक्षा के दौरान संवेदनहीनता की सारी हदें पार हो गईं। एक परीक्षा केंद्र पर 10वीं की छात्रा को पीरियड्स (माहवारी) शुरू होने के बावजूद न तो वॉशरूम जाने दिया गया और न ही उसे कोई मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई। इस घटना ने...
नेशनल डेस्क। महाराष्ट्र के नासिक में बोर्ड परीक्षा के दौरान संवेदनहीनता की सारी हदें पार हो गईं। एक परीक्षा केंद्र पर 10वीं की छात्रा को पीरियड्स (माहवारी) शुरू होने के बावजूद न तो वॉशरूम जाने दिया गया और न ही उसे कोई मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई गई। इस घटना ने शिक्षा तंत्र और परीक्षा केंद्रों पर तैनात स्टाफ की मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार 10वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान एक छात्रा को अचानक पीरियड्स शुरू हो गए। छात्रा ने असहनीय दर्द और असुविधा के कारण वहां मौजूद पर्यवेक्षक (Supervisor) से वॉशरूम जाने की गुहार लगाई लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसे अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया गया। छात्रा को पूरे पेपर के दौरान अपनी सीट पर ही बैठे रहने के लिए मजबूर किया गया।
पेपर के बाद भी नहीं मिली मदद
जुल्म यहीं खत्म नहीं हुआ। परीक्षा खत्म होने के बाद भी सेंटर पर मौजूद महिला स्टाफ या अन्य कर्मचारियों ने छात्रा को सैनिटरी पैड तक उपलब्ध नहीं कराया। छात्रा को उस गंभीर स्थिति में ही घर वापस जाना पड़ा। जब यह बात छात्रा के परिवार को पता चली तो उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत शिक्षा विभाग और बोर्ड से की।
बोर्ड का सख्त एक्शन
मामला तूल पकड़ते ही शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल (MSBSHSE) ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित परीक्षा केंद्र को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। बोर्ड के नियमों के मुताबिक मेडिकल इमरजेंसी या ऐसी स्थितियों में छात्रों को उचित सहायता और ब्रेक देना अनिवार्य है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर केंद्र के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य के लिए गाइडलाइन्स सख्त की जाएंगी।
सम्मान और स्वास्थ्य का मुद्दा
यह घटना सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं है बल्कि एक किशोरी की गरिमा और उसके स्वास्थ्य के साथ किया गया बड़ा खिलवाड़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों और परीक्षा केंद्रों पर 'पीरियड्स' जैसे संवेदनशील मुद्दों पर स्टाफ को ट्रेनिंग देना बहुत जरूरी है ताकि किसी और छात्रा को ऐसी शर्मिंदगी और दर्द से न गुजरना पड़े।