ईरान पर ट्रंप का आर्थिक शिकंजा, भारत के बासमती निर्यात पर बढ़ा संकट

Edited By Updated: 26 Aug, 2026 11:32 AM

india suffers blow from trump s economic offensive against iran

ईरान के खिलाफ अमेरिका के नए ‘ऑपरेशन इकनॉमिक आउटकास्ट’ से भारत के लिए व्यापार, शिपिंग और ऊर्जा क्षेत्र में जोखिम बढ़ने की आशंका है। करीब छह महीने के सैन्य संघर्ष के बाद भी निर्णायक नतीजा नहीं निकलने पर ट्रंप प्रशासन अब ईरान की

नई दिल्लीः ईरान के खिलाफ अमेरिका के नए ‘ऑपरेशन इकनॉमिक आउटकास्ट’ से भारत के लिए व्यापार, शिपिंग और ऊर्जा क्षेत्र में जोखिम बढ़ने की आशंका है। करीब छह महीने के सैन्य संघर्ष के बाद भी निर्णायक नतीजा नहीं निकलने पर ट्रंप प्रशासन अब ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए वित्तीय और व्यापारिक दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट ने देशों को ईरान के साथ कारोबार सीमित करने की चेतावनी देते हुए आने वाले दिनों में नए प्रतिबंधों के संकेत दिए हैं।

बासमती चावल के निर्यात पर पड़ सकता है असर

भारत पर इसका सीधा असर बासमती चावल के निर्यात पर पड़ सकता है। भारत हर साल करीब 50-60 लाख टन बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें लगभग 10 लाख टन ईरान जाता है। वित्त वर्ष 2026 में ईरान को भारत का कुल निर्यात करीब 1.3 अरब डॉलर रहा, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी बासमती चावल की थी। कारोबारियों के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट में व्यवधान और परिवहन संबंधी मुश्किलों के कारण अप्रैल-जून के दौरान ईरान को बासमती निर्यात करीब 62 प्रतिशत घटकर 1,20,847 टन रह गया।

निर्यातकों की चिंता अब संभावित द्वितीयक प्रतिबंधों को लेकर है। यदि ईरान से जुड़े लेनदेन में यूएई के जरिए होने वाला भुगतान प्रभावित होता है, तो भारतीय कारोबारियों के लिए वित्तीय संकट गहरा सकता है। हालांकि, कुछ निर्यातकों का मानना है कि ईरान एक बड़ा बाजार है और वैकल्पिक भुगतान तथा आपूर्ति मार्ग तलाशे जा सकते हैं।

भारत-ईरान व्यापार घटा

भारत-ईरान व्यापार पहले ही काफी सिकुड़ चुका है। वित्त वर्ष 2019 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 17 अरब डॉलर था, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर लगभग 1.6 अरब डॉलर रह गया। भारत द्वारा ईरानी कच्चे तेल की खरीद बंद करना इसकी प्रमुख वजह रही। इस बीच अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रो-रसायन कारोबार से जुड़े चार भारतीय कारोबारों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इससे अनुपालन लागत और वित्तीय जोखिम बढ़ सकते हैं।

मालभाड़े पर भी पड़ा असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर मालभाड़े पर भी पड़ रहा है। बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी आई है और कई जहाज केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से जा रहे हैं। इससे भारत के लिए परिवहन समय और लागत बढ़ सकती है। हालांकि, कमजोर वैश्विक मांग और पहले से कम तेल आपूर्ति के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तत्काल बड़ी तेजी की संभावना सीमित बताई जा रही है।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम ईरान के साथ व्यापार में गिरावट से ज्यादा अमेरिकी प्रतिबंधों का रूस जैसे अन्य साझेदारों तक फैलना और पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी रहने वाला तनाव है।
 

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