Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Mar, 2026 03:13 PM

आयकर नियमों के तहत टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा बदलाव किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। अब यदि किसी व्यक्ति की वास्तविक आय स्पष्ट नहीं है या उससे जुड़े दस्तावेज अधूरे हैं, तो आयकर विभाग स्वयं उसकी आय का अनुमान लगाकर टैक्स तय कर सकता है।
बिजनेस डेस्कः आयकर नियमों के तहत टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा बदलाव किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। अब यदि किसी व्यक्ति की वास्तविक आय स्पष्ट नहीं है या उससे जुड़े दस्तावेज अधूरे हैं, तो आयकर विभाग स्वयं उसकी आय का अनुमान लगाकर टैक्स तय कर सकता है।
यह प्रावधान खास तौर पर उन लोगों पर लागू होगा जो समय पर ITR दाखिल नहीं करते या विभाग के नोटिस का जवाब देने में लापरवाही बरतते हैं। नए नियम के तहत असेसिंग ऑफिसर (AO) को “बेस्ट जजमेंट असेसमेंट” का अधिकार दिया गया है, जिसके जरिए वह उपलब्ध जानकारी के आधार पर आय का अनुमान लगा सकता है।
कब लागू होगा यह नियम?
जब टैक्सपेयर्स अपनी आय का स्पष्ट ब्योरा देने में असफल रहते हैं, ITR दाखिल नहीं करते या नोटिस का जवाब नहीं देते—तब AO यह अधिकार इस्तेमाल कर सकता है।
कैसे तय होगी अनुमानित आय?
विशेषज्ञों के मुताबिक, विभाग कारोबार के प्रतिशत, प्रॉफिट रेशियो या उपलब्ध डेटा के आधार पर आय का आकलन कर सकता है। यानी अगर रिकॉर्ड साफ नहीं है, तो विभाग अपनी गणना से टैक्स निर्धारित करेगा।
किन पर ज्यादा असर?
यह नियम खास तौर पर NRI, इंटरनेशनल इनकम वाले व्यक्तियों और ऐसे कारोबारी जिनके रिकॉर्ड व्यवस्थित नहीं हैं, उनके लिए ज्यादा सख्त साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि समय पर ITR फाइल करें, सभी जरूरी दस्तावेज अपडेट रखें और आयकर विभाग के नोटिस का तुरंत जवाब दें।